Jhabua कागजों में मृत, हकीकत में जिंदा: 2 साल तक पहचान के लिए भटकता रहा दिव्यांग
झाबुआ में प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। जहां 98 प्रतिशत दिव्यांग बादर सिंह मुनिया को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। इस गलती के कारण उनकी पेंशन और राशन जैसी सुविधाएं बंद हो गईं। करीब दो साल तक वे खुद को जिंदा साबित करने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाते रहे।
ग्राम मदरानी निवासी बादर सिंह मुनिया को रिकॉर्ड में मृत घोषित किए जाने के बाद उनकी समग्र आईडी से नाम हटा दिया गया।
इसके चलते उन्हें मिलने वाली दिव्यांग पेंशन और राशन जैसी जरूरी योजनाओं का लाभ बंद हो गया।
शारीरिक रूप से 98 प्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद बादर सिंह लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते रहे।
लेकिन लंबे समय तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका।
आखिरकार मंगलवार को वे थांदला जनसुनवाई में पहुंचे और कलेक्टर के सामने अपनी पीड़ा रखी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।
साथ ही रिकॉर्ड सुधारने, समग्र आईडी बहाल करने और बंद योजनाओं का लाभ दोबारा शुरू कराने के निर्देश दिए।
यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, जहां एक जिंदा व्यक्ति को अपनी पहचान साबित करने के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा।
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