लश्कर के वरिष्ठ कमांडर कारी सईद अब्दुल अजीज की इस्लामाबाद की मस्जिद में संदिग्ध मौत
लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कैडर कारी सईद अब्दुल अजीज की इस्लामाबाद की मस्जिद में नमाज पढ़ते समय अचानक मौत हो गई। वह हाफिज़ सईद का करीबी था।
लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कैडर कारी सईद अब्दुल अजीज की शनिवार को इस्लामाबाद की क्यूबा मस्जिद में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बताया जा रहा है कि कारी सईद ने किसी अज्ञात जगह पर भोजन किया था और उसके तुरंत बाद वह नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद पहुँचा था। जैसे ही वह मस्जिद के मुख्य गेट के पास पहुँचा, वह अचानक चक्कर खाकर जमीन पर गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई।
कारी सईद लश्कर-ए-तैयबा संगठन के उस विशेष प्रशासनिक विभाग की जिम्मेदारी संभालता था, जो मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए लश्कर के आतंकियों के परिवारों से लगातार संपर्क रखता था और उनकी आर्थिक मदद व देखरेख का काम देखता था। हालाँकि, उसकी अचानक हुई इस मौत की वास्तविक वजह अभी तक पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है, जिसके चलते इस पूरे मामले को लेकर कई तरह के गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
🤲 नमाज पढ़ने मस्जिद पहुँचा था आतंकी कारी सईद, सीसीटीवी फुटेज आया सामने
सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स और सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, आतंकी कारी सईद उर्फ अब्दुल अजीज इस्लामाबाद में स्थित लश्कर की 'कूबा मस्जिद' में अपने कंधे पर बैग टाँगकर नमाज अदा करने के लिए पहुँचता है। मस्जिद में प्रवेश करने के बाद वह अपने साथ मौजूद एक अन्य साथी को अपना बैग पकड़ाता है और नमाज शुरू होने से पहले नियमानुसार वूजू करता है।
वूजू करने के बाद जैसे ही आतंकी कारी सईद अपना बैग वापस लेकर सीढ़ियाँ चढ़कर मस्जिद के मुख्य हॉल की ओर नमाज पढ़ने के लिए बढ़ता है, और जैसे ही वह अपनी चप्पल उतारने के लिए नीचे बैठता है, वह एकाएक अछूत होकर जमीन पर गिर पड़ता है।
पास ही मौजूद लश्कर-ए-तैयबा के अन्य कैडर और समर्थक तुरंत दौड़कर उसे उठाते हैं और किसी गुप्त स्थान पर ले जाते हैं, जहाँ साँसें रुकने पर उसे तुरंत सीपीआर (CPR) देने का प्रयास किया जाता है। लेकिन इसके बावजूद कारी सईद को कोई होश नहीं आता है। इसके बाद उसे गंभीर हालत में एक अस्पताल ले जाया जाता है, जहाँ डॉक्टरों द्वारा उसे मृत घोषित कर दिया जाता है।
🤝 खूंखार आतंकी हाफिज़ सईद के साथ लंबे समय से जुड़ा था कारी सईद
खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक कारी सईद साल 1990 के शुरुआती दौर से ही कुख्यात आतंकी और मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज़ सईद के साथ बेहद करीबी तौर पर जुड़ा हुआ था और उसका एक खास कमांडर माना जाता था।
वर्ष 2017 तक कारी सईद उर्फ अब्दुल अजीज एक सक्रिय आतंकी के रूप में कार्य कर रहा था, और उसका मुख्य काम भारत के खिलाफ साजिश रचने के लिए लश्कर-ए-तैयबा में नए आतंकवादियों की भर्ती करना था। बाद में संगठन ने उसे अपनी प्रशासनिक विंग में लगा दिया था।
उसकी मुख्य जिम्मेदारी पाकिस्तान के दक्षिण पंजाब क्षेत्र यानी मुल्तान, बहावलपुर और डेरा गाजी खान के उन स्थानीय आतंकियों के परिजनों को हर महीने नियमित रूप से पेंशन पहुँचाना था, जो भारत में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे जा चुके थे। इसके साथ ही, वह इन्हीं जिलों से ताल्लुक रखने वाले नए आतंकियों की एक विस्तृत सूची तैयार करने का काम भी संभाल रहा था।
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