Sendhwa किले की ऐतिहासिक विरासत सहेजने की तैयारी, पुरातत्व विभाग ने बनाई रिपोर्ट
सेंधवा शहर के पुरातत्वकालीन ऐतिहासिक किले का संभागीय पुरातत्व विभाग की टीम ने राजस्व और नगर पालिका टीम का साथ किया निरीक्षण,प्राचीन धरोहर के संरक्षण और विकास कार्यों को लेकर बनाएंगे योजना,निरीक्षण की रिपोर्ट उच्च कार्यालय को भेजने की कही बात
निमाड़ की ऐतिहासिक पहचान और गौरव का प्रतीक सेंधवा का प्राचीन किला आज भी अपने भीतर सदियों पुराना इतिहास समेटे हुए है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI के संरक्षण में शामिल यह किला कभी व्यापारिक और सैन्य दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता था।
ऐतिहासिक किला मराठा काल की स्थापत्य कला और सुरक्षा व्यवस्था का अनोखा उदाहरण माना जाता है। पुराने समय में मालवा, निमाड़ और महाराष्ट्र को जोड़ने वाले व्यापारिक मार्ग की निगरानी के लिए इस किले का उपयोग किया जाता था।
किले की विशाल पत्थर की दीवारें, ऊंचे बुर्ज और प्राचीन संरचनाएं आज भी उस दौर की कहानी बयां करती हैं। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से पूरे क्षेत्र पर नजर रखी जाती थी।वर्तमान में यह किला भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन संरक्षित स्मारक है। हालांकि समय के साथ इसके कई हिस्से जर्जर हो चुके हैं, लेकिन आज भी यह निमाड़ की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।मंगलवार को संभागीय पुरातत्व विभाग ने तहसीलदार और नगर पालिका सीएमओ मधु चौधरी के साथ संयुक्त रूप से किले का निरक्षण किया।संभागीय टीम ने किया किले की दीवारों,गेट,पुरानी मूर्तियों प्राचीन तालाब,सहित प्राचीन तोपो का किया निरीक्षण कर दीवारों,तोपो, मूर्तियों के लिए फोटो वीडियो बनाएं पुरातत्व विभाग के उपसंचालक एल डाबी ने बताया कि कलेक्टर बड़वानी के निर्देशन में आज निरीक्षण किया हैं निरीक्षण की रिपोर्ट कलेक्टर सहित उच्च कार्यालय को प्रेषित की जाएगी। यहां किले के संरक्षण और इसके विकास को लेकर क्या किया का सकता है। इस पर काम किया जाएगा
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