शाहनगर के कन्या छात्रावास में जर्मन शेफर्ड कुत्ते पालने पर विवाद, छात्राओं ने जताई दहशत

पन्ना के शाहनगर कन्या छात्रावास में अधीक्षिका द्वारा जर्मन शेफर्ड कुत्ते पालने का मामला सामने आया है। छात्राओं की शिकायत पर विभाग ने नोटिस जारी कर कुत्ते हटाने के निर्देश दिए हैं।

Aug 09, 2026 - 20:34
0
शाहनगर के कन्या छात्रावास में जर्मन शेफर्ड कुत्ते पालने पर विवाद, छात्राओं ने जताई दहशत

पन्ना: पन्ना जिले के शाहनगर स्थित शासकीय अनुसूचित जाति सीनियर कन्या उत्कृष्ट छात्रावास में जर्मन शेफर्ड नस्ल के दो खतरनाक कुत्ते होने के कारण वहाँ रहने वाली छात्राओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। छात्राओं का गंभीर आरोप है कि ये खतरनाक कुत्ते छात्रावास की अधीक्षिका दीपिका उईके द्वारा पाले गए हैं और इन्हें सीधे छात्रावास परिसर के अंदर ही रखा जाता है। यह मामला सामने आने के बाद आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक ने इसे पूरी तरह से नियमों के खिलाफ बताते हुए अधीक्षिका को तत्काल प्रभाव से कुत्ते हटाने के कड़े निर्देश दिए हैं।

🏫 गर्ल्स हॉस्टल में अधीक्षिका पर कुत्ते पालने और खुला छोड़ने का आरोप

पन्ना जिले के शाहनगर स्थित इस शासकीय अनुसूचित जाति सीनियर कन्या उत्कृष्ट छात्रावास की अधीक्षिका दीपिका उईके पर यह मुख्य आरोप है कि उन्होंने छात्रावास परिसर के भीतर जर्मन शेफर्ड नस्ल के दो खतरनाक कुत्ते पाल रखे हैं। छात्राओं का आरोप है कि उनके द्वारा इन कुत्तों को अक्सर छात्रावास प्रांगण के अंदर खुला छोड़ दिया जाता है। इस वजह से जब भी कोई छात्रा या अन्य व्यक्ति छात्रावास के अंदर आता-जाता है, तो ये कुत्ते आक्रामक हो जाते हैं और उन पर झपटने या हमला करने की कोशिश करते हैं।

😨 डर के साये में जीने को मजबूर हैं हॉस्टल में रहने वाली 50 छात्राएं

छात्रावास के भीतर कुत्ते पाले जाने की वजह से वहाँ रह रही छात्राओं का आवागमन बेहद कठिन हो गया है। छात्राओं का कहना है कि जब भी उन्हें छात्रावास के अंदर आना या जाना होता है, तो पहले मुख्य गेट पर खड़े होकर तेज आवाज देनी पड़ती है, ताकि कोई आकर इन कुत्तों को बाँध सके। इसके बाद ही वे छात्रावास के कमरों तक जा पाती हैं। यदि ऐसा न किया जाए, तो दोनों कुत्ते तुरंत आक्रामक रूप धारण कर लेते हैं। इसके अलावा, यहाँ आने-जाने वाले अन्य लोगों पर भी ये कुत्ते दिनभर गेट पर खड़े होकर भोंकते रहते हैं, जिससे छात्रावास में रहने वाली सभी 50 छात्राएँ एक दशक से सहमी हुई और डर के माहौल में जीवन बिता रही हैं।

👩‍🎓 उत्कृष्ट विद्यालय में पढ़ाई करती हैं हॉस्टल की छात्राएं

आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस आवासीय छात्रावास में कुल 50 छात्राएँ निवास करती हैं, जो स्थानीय उत्कृष्ट विद्यालय शाहनगर में अपनी शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। इस हॉस्टल में कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक की छात्राएँ रहती हैं, जिन्हें रोजाना सुबह स्कूल जाने और छुट्टी के बाद वापस छात्रावास लौटना पड़ता है। इस पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रही अधीक्षिका दीपिका उईके पर आरोप है कि उन्होंने प्रशासनिक नियमों को ताक पर रखकर छात्रावास प्रांगण के अंदर खतरनाक नस्ل के कुत्ते पाल रखे हैं।

🐒 अधीक्षिका का अजीब तर्क: 'बंदरों के आतंक से बचने के लिए पाले हैं कुत्ते'

इस पूरे विवाद पर सफाई देते हुए छात्रावास की अधीक्षिका दीपिका उईके का कहना है, "छात्रावास के आसपास जंगली बंदरों का बहुत अधिक आतंक है, जो अक्सर छात्रावास परिसर के अंदर घुस आते हैं और यहाँ रहने वाले लोगों को चोटिल कर देते हैं। इन बंदरों ने पहले भी कई लोगों पर हमला किया है। इसी समस्या से बचाव के लिए हमने यहाँ कुत्ते पाले हैं ताकि बंदर परिसर में प्रवेश न कर सकें। बंदरों से हो रही इस गंभीर परेशानी की सूचना हमने पहले ही वन विभाग और ग्राम पंचायत को लिखित में दी थी, लेकिन जब बंदरों का आना बंद नहीं हुआ, तब मजबूरी में ये कुत्ते पाले गए हैं।"

⚠️ विभाग की सख्त कार्रवाई: हॉस्टल वार्डन को जारी किया गया शो कॉज नोटिस

इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक जय प्रताप भदोरिया से जब इस संबंध में बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यह मामला एक दिन पहले ही हमारे संज्ञान में आया है। किसी भी शासकीय छात्रावास परिसर के भीतर इस तरह कुत्ते पालना पूरी तरह से अनुचित और नियमों के विरुद्ध है। इस लापरवाही पर संज्ञान लेते हुए छात्रावास अधीक्षिका को आधिकारिक तौर पर 'शो कॉज नोटिस' (कारण बताओ नोटिस) जारी कर दिया गया है और तुरंत प्रभाव से उन कुत्तों को छात्रावास परिसर से बाहर हटाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।"

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User