Bdwani नर्मदा किनारे प्यासा गांव, बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग रात 3 बजे पानी की जंग
बड़वानी जिले के सेमलेट पंचायत के कोट बामनी गांव में भीषण जल संकट गहराता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को रात 3 बजे उठकर पानी की तलाश में निकलना पड़ रहा है। गांव में बंद पड़े हैंडपंप और दूषित कुओं के सहारे लोग जीवन गुजारने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
बड़वानी जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित कोट बामनी गांव में इन दिनों पानी का गंभीर संकट बना हुआ है।
करीब 840 आबादी वाले इस गांव में 500 से ज्यादा लोग पेयजल की भारी किल्लत झेल रहे हैं।
ग्रामीणों को रोजाना अंधेरे में तीन से चार किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है।
टॉर्च की रोशनी में महिलाएं, पुरुष और बच्चे कुओं और छोटे जल स्रोतों से पानी भरकर घर पहुंचाते हैं।
गांव के दोनों हैंडपंप वर्षों से बंद पड़े हैं, जबकि प्राकृतिक कुओं का पानी भी पीने योग्य नहीं बचा है।
कुओं में जमी काई और गंदा पानी ग्रामीणों की मजबूरी को साफ बयां करता है।दूषित पानी के इस्तेमाल से बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है, लेकिन ग्रामीणों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत और आवेदन देने के बावजूद अब तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
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