जबलपुर मेडिकल कॉलेज में कान की जटिल सर्जरी पर वर्कशाप, आधुनिक तकनीकों का लाइव प्रदर्शन
जबलपुर में कान की जटिल सर्जरी पर तीन दिवसीय वर्कशाप आयोजित की गई है। इसमें माइक्रोस्कोपिक और लेजर तकनीक से इलाज का लाइव प्रदर्शन किया गया।
जबलपुर। कान की जटिल से जटिल सर्जरी के क्षेत्र में माइक्रोस्कोपिक, एंडोस्कोपिक और लेजर तकनीक ने इलाज की प्रक्रिया को पहले की तुलना में कहीं अधिक सटीक और सुरक्षित बना दिया है। इन आधुनिक और उन्नत तकनीकों की मदद से कान से लगातार मवाद आने, पर्दे में छेद होने, बहरापन, ओटोस्क्लेरोसिस और वर्टिगो (चक्कर आना) जैसी गंभीर समस्याओं के मूल और वास्तविक कारणों तक पहुँचना अब बेहद आसान हो गया है।
⚙️ पहले जटिल कान की सर्जरी में आती थीं कई स्तरों पर बड़ी चुनौतियाँ
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ डॉ. विजयेंद्र ने अपने विचार रखते हुए कहा कि पहले के समय में कान की जटिल सर्जरी करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती हुआ करती थी, जिसमें कई स्तरों पर जोखिम रहता था। लेकिन आज के दौर में आधुनिक और हाई-टेक उपकरणों ने सर्जन के लिए प्रभावित हिस्से को अत्यधिक स्पष्टता के साथ देखने, बीमारी के सटीक कारण की पहचान करने और ऑपरेशन की एक बेहतर और सुरक्षित योजना बनाने में बहुत मदद की है।
🎥 मवाद आने और वर्टिगो से जुड़ी सर्जरी का किया गया जीवंत प्रदर्शन
इस आयोजन को कान की सर्जरी के क्षेत्र में तकनीक के एक बड़े और सकारात्मक बदलाव के रूप में रेखांकित किया गया। इस विशेष कार्यशाला (Workshop) में बेंगलुरु से पधारे प्रख्यात विशेषज्ञ डॉ. विजयेंद्र और डॉ. विनय ने मुख्य फैकल्टी के रूप में डॉक्टरों और छात्रों को प्रशिक्षण दिया। ईएनटी (ENT) विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. कविता सचदेवा के कुशल नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान ‘माइक्रोस्कोपिक तकनीक से फेशियल डिविएशन, कान के पर्दे के छेद, ओटोस्क्लेरोसिस, लगातार मवाद आने और वर्टिगो’ से जुड़ी जटिल सर्जरी का लाइव (जीवंत) प्रदर्शन किया गया।
⏱️ आठ घंटे से अधिक समय तक चला गहन तकनीकी प्रशिक्षण सत्र
रविवार को सुबह ठीक आठ बजे से शुरू हुए विभिन्न तकनीकी सत्र लगातार आठ घंटे से अधिक समय तक पूरी सक्रियता के साथ चले। इस कार्यशाला में मेडिकल कॉलेज के 12 पीजी (PG) छात्रों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के विभिन्न अन्य जिलों से आए 28 पीजी छात्रों ने भी भाग लिया और कान की आधुनिक सर्जरी की अत्याधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक (Practical) प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके अलावा जबलपुर, विदिशा, भोपाल, उज्जैन, खंडवा, ग्वालियर और सागर समेत कई अन्य जिलों से आए 12 विशेषज्ञ ईएनटी सर्जन भी इन तकनीकी सत्रों में विशेष रूप से शामिल हुए।
🏥 ऑपरेशन थियेटर में तकनीक का लाइव प्रदर्शन और सफल सर्जरी
इस कार्यशाला के दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए कुल आठ चिन्हित मरीजों में से पहले ही दिन छह मरीजों की अत्यंत सफल सर्जरी की गई। इन मरीजों में कान से लगातार मवाद आने, पर्दे में बड़ा छेद होने, आनुवंशिक बहरापन सहित अन्य कान संबंधी गंभीर विकारों से पीड़ित लोग शामिल थे। देश के नामी विशेषज्ञों ने पीजी छात्रों और युवा सर्जनों को ऑपरेशन के दौरान आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल और बरती जाने वाली जरूरी सावधानियों का बेहद बारीकी से व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
🎧 विशेषज्ञों ने युवाओं को ईयरफोन और ईयरबड्स के अत्यधिक इस्तेमाल पर चेताया
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. विनय ने आज की युवा पीढ़ी को विशेष रूप से आगाह करते हुए ईयरफोन और ईयरबड्स के अत्यधिक तथा लगातार इस्तेमाल से बचने की सख्त सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इनका अनावश्यक और जरूरत से ज्यादा उपयोग सुनने की क्षमता (Hearing Power) पर बहुत प्रतिकूल और नकारात्मक असर डाल सकता है। अपने कानों को लंबे समय तक स्वस्थ और सुरक्षित बनाए रखने के लिए इनके रोजाना के इस्तेमाल को सीमित रखना बेहद आवश्यक है।
💡 विशेषज्ञों की मुख्य बातें और कार्यशाला के प्रमुख बिंदु
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विशेषज्ञों का संदेश: युवा ईएनटी सर्जनों और पीजी छात्रों के लिए यह कार्यशाला कौशल विकास के लिहाज से बेहद उपयोगी है। विशेषज्ञ ऑपरेशनों के दौरान बरती जाने वाली हर छोटी-बड़ी सावधानी साझा कर रहे हैं, जिससे मरीजों के इलाज में जोखिम को कम करने और उनकी रिकवरी को तेज करने में मदद मिलेगी।
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प्रमुख फोकस बिंदु: कार्यशाला के दौरान माइक्रोस्कोपिक सर्जरी, एंडोस्कोपिक तकनीक, लेजर तकनीक, पर्दे के छेद की सर्जरी, ओटोस्क्लेरोसिस, वर्टिगो, कान से मवाद की समस्या और सर्जरी के दौरान जोखिम कम करने की तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया।
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