नकुलनाथ की हार के बाद छिंदवाड़ा में कांग्रेस का 'कमबैक' प्लान, कार्यकर्ताओं को दिया जा रहा प्रशिक्षण
छिंदवाड़ा में नकुलनाथ की हार के बाद कांग्रेस ने अपनी खोई जमीन पाने के लिए कमर कस ली है। पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में आयोजित प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने की कोशिश जारी है।
दशकों तक पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का अभेद गढ़ कहे जाने वाले छिंदवाड़ा में अब कांग्रेस अपनी खोई हुई सियासी जमीन वापस पाने के लिए फिर से एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले तक छिंदवाड़ा और कमलनाथ एक-दूसरे के पर्याय माने जाते थे, लेकिन नकुलनाथ की हार के बाद जिले का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। अब छिंदवाड़ा बीजेपी के लिए अभेद दुर्ग नहीं रहा। अपनी इस पुरानी साख को बहाल करने के लिए मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अब छिंदवाड़ा की कमान अपने हाथों में ले ली है।
🕰️ कमलनाथ का 40 साल का तिलिस्म और बदलती सियासत
वरिष्ठ पत्रकार मनीष तिवारी के अनुसार, "दशकों तक छिंदवाड़ा का मतलब कांग्रेस के लिए सिर्फ कमलनाथ हुआ करता था। 40 साल तक टिकट वितरण से लेकर हर महत्वपूर्ण निर्णय तक, कमलनाथ की ही चलती थी। लेकिन राज्य में सरकार गिरने और फिर नकुलनाथ की लोकसभा चुनाव में हार के बाद, कमलनाथ का वह पुराना तिलिस्म टूटता नजर आ रहा है।" स्थिति यह है कि दो साल पहले तक जहाँ 'जय-जय कमलनाथ' के नारे गूंजते थे, वहीं अब कार्यकर्ताओं के बीच 'जीतू पटवारी जिंदाबाद' के नारे सुनाई देने लगे हैं, जो सीधे तौर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बढ़ती सक्रियता को दर्शाते हैं।
🎓 प्रशिक्षण शिविर के जरिए कार्यकर्ताओं में भरने की कोशिश नई ऊर्जा
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने छिंदवाड़ा में आयोजित दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर के दौरान कहा कि किसी भी पार्टी की विचारधारा को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य है। उन्होंने राज्य की वर्तमान स्थितियों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि पेपर लीक, किसानों की बदहाली और युवाओं की बेरोजगारी जैसे मुद्दे जनता के बीच प्रमुख हैं। पटवारी का दावा है कि दतिया उपचुनाव के परिणामों की तरह ही छिंदवाड़ा में भी लोग फिर से कांग्रेस की ओर रुख करेंगे। उन्होंने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता अब जमीनी हकीकत को समझ चुकी है।
🔄 बेटे नकुलनाथ को सक्रिय कर कमलनाथ की नई रणनीति
छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र की कुल 7 विधानसभा सीटों में से वर्तमान में 6 पर कांग्रेस का कब्जा है, जबकि कमलनाथ स्वयं यहाँ के विधायक हैं। बढ़ती उम्र और बदली परिस्थितियों को देखते हुए, कमलनाथ अब अपने बेटे नकुलनाथ को छिंदवाड़ा की राजनीति में पूरी तरह सक्रिय कर रहे हैं। अब नकुलनाथ छिंदवाड़ा के दौरों पर अधिकांश समय अकेले ही दिखाई देते हैं। वहीं, दूसरी ओर बीजेपी के जिला मीडिया प्रभारी संदीप सिंह चौहान का कहना है कि कमलनाथ ने 40 साल की राजनीति में पार्टी के बजाय केवल अपने परिवार को मजबूत किया है, जिसके कारण आज कार्यकर्ताओं में असंतोष है। इस बीच, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार की उपस्थिति में आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर कांग्रेस के लिए आगामी चुनौतियों से निपटने की एक नई रणनीति मानी जा रही है।
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