सीहोर में उफनते नाले से गुजरानी पड़ी अंतिम यात्रा, श्मशान तक सड़क न होने से ग्रामीणों की मजबूरी

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में सड़क और पुल न होने के कारण ग्रामीणों को उफनते नाले के बीच से शव यात्रा निकालनी पड़ी। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन जांच कर रहा है।

Aug 11, 2026 - 12:44
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सीहोर में उफनते नाले से गुजरानी पड़ी अंतिम यात्रा, श्मशान तक सड़क न होने से ग्रामीणों की मजबूरी

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर ब्लॉक से एक बेहद विचलित करने वाला और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक बुजुर्ग महिला की अंतिम यात्रा को ग्रामीणों ने उफनते हुए बरसाती नाले के बीच से अपनी जान जोखिम में डालकर निकाला। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी तेजी से सामने आया है, जिसमें ग्रामीण शव को कंधों पर उठाकर कमर तक भरे पानी और तेज बहाव वाले नाले को पार करते हुए साफ नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में बरसात के कारण सड़कों की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि शव वाहन तो दूर, सामान्य आवागमन भी मुश्किल हो गया है, जिसके चलते मजबूर होकर ग्रामीणों को अपने ही कंधों पर शव ले जाना पड़ा।

🚧 उफनता नाला और खराब सड़कें बनी ग्रामीणों के लिए जी का जंजाल

यह गंभीर मामला सीहोर जिले की ग्राम पंचायत मूडला खुर्द के अंतर्गत आने वाले कचनारिया गांव का है। यहाँ एक बुजुर्ग महिला का निधन हो जाने के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार की तैयारी की, लेकिन गांव में पक्की सड़क का अभाव और श्मशान घाट के रास्ते में उफनता हुआ बरसाती नाला सबसे बड़ी बाधा बन गया। स्थिति यह थी कि वाहन के अभाव में शवयात्रा को इस जानलेवा पानी के बीच से ही ले जाना ही एकमात्र विकल्प बचा था।

🏛️ प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर खड़े हुए बड़े सवाल

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह संसदीय रूप से विदिशा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है जो कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संसदीय क्षेत्र है। इसके साथ ही, यह इलाका प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का गृह विधानसभा क्षेत्र भी है। इसके बावजूद, एक बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीणों को जिस अमानवीय और दर्दनाक संघर्ष से गुजरना पड़ा, वह शासन-प्रशासन के विकास के दावों की पोल खोलता है। गांव में श्मशान घाट तक पहुँचने के लिए नाले पर एक अदद पुल तक का निर्माण नहीं कराया गया है।

👥 आक्रोशित ग्रामीणों की दो टूक और प्रशासन का बयान

जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार करने के बाद ग्रामीणों ने किसी तरह अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया और वे मूलभूत सुविधाओं के अभाव के लिए प्रशासनिक तंत्र को कोसते नजर आए। ग्रामीण आकाश ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, "सालों से इस रास्ते के निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन चुनावों के समय नेता सिर्फ वोट मांगने आते हैं और सड़क जैसी बुनियादी जरूरत पर कोई ध्यान नहीं देता।"

इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद तहसीलदार आकाश महंत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, "सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से बुजुर्ग के अंतिम संस्कार के इस वीडियो की जानकारी मिली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जाँच टीम मौके पर भेजी जा रही है, और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।"

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