हत्या के मामले में 10 साल जेल काटने वाला युवक दोषमुक्त, हाईकोर्ट ने दिए तुरंत रिहाई के आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में 10 साल से अधिक सजा काट रहे युवक और उसके परिवार को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने तुरंत रिहाई के आदेश दिए हैं।

Aug 11, 2026 - 12:41
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हत्या के मामले में 10 साल जेल काटने वाला युवक दोषमुक्त, हाईकोर्ट ने दिए तुरंत रिहाई के आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आपराधिक न्याय प्रणाली और साक्ष्यों की प्रामाणिकता से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने हत्या के एक मामले में करीब 10 साल और 6 महीने की लंबी कैद काट चुके एक युवक समेत उसके पिता और भाई को सबूतों के अभाव में पूरी तरह से दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में पाया कि मुख्य आरोपी जितेंद्र यादव वारदात के समय झांसी के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती था, इसके बावजूद उसे निचली अदालत से सजा दे दी गई थी, जिसके कारण उसे बिना किसी ठोस आधार के इतने लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ा।

🩸 क्या था परमानंद यादव हत्याकांड का पूरा मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 13 नवंबर 2015 को पुरानी रंजिश और आपसी विवाद के चलते राजेंद्र यादव, उसके बेटे सत्येंद्र यादव व जितेंद्र यादव सहित तीन अज्ञात व्यक्ति लाइसेंसी बंदूक, तलवार, फर्सा और लाठियों से लैस होकर परमानंद यादव के घर पहुँचे थे और बाहर निकालकर उस पर हमला कर दिया था। इस हमले में बीच-बचाव करने आए परिवार के अन्य सदस्यों को भी चोटें आईं और अंततः परमानंद यादव की मृत्यु हो गई थी। इस मामले में निवाड़ी के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिसके दौरान राजेंद्र और सत्येंद्र को जमानत मिल गई थी, लेकिन जितेंद्र पिछले 10 साल 6 महीने से लगातार जेल में सजा काट रहा था।

🏥 अस्पताल के दस्तावेजों और गवाहों से साबित हुआ जितेंद्र का निर्दोष होना

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सबसे बड़ा और निर्णायक तथ्य सामने आया कि घटना के वक्त जितेंद्र झांसी के सरकारी अस्पताल में किडनी की पथरी (Kidney Stone) के इलाज के लिए भर्ती था। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उसे अगले दिन रेफर किया गया था और उन्होंने उसका ऑपरेशन किया था। इसके अलावा, अस्पताल के वार्ड बॉय और नर्स ने भी दस्तावेजों के साथ उसके वहाँ भर्ती होने की पूरी पुष्टि की। वहीं, दूसरे आरोपी पिता राजेंद्र यादव ने साबित किया कि वे घटना के समय अपने खेत में सिंचाई कर रहे थे।

❌ साक्ष्यों और बयानों में विरोधाभास के चलते हाईकोर्ट ने पलटा फैसला

माननीय हाईकोर्ट ने मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए पाया कि अभियोजन पक्ष और शिकायतकर्ताओं के बयानों में भारी विरोधाभास था। मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों (भारी व धारदार हथियार के घाव) का मिलान उपयोग किए गए हथियारों से नहीं हो रहा था, और डॉक्टर ने भी यह स्वीकार किया था कि मौत का कारण सिर में गंभीर चोट और कोमा था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि चोटें आरोपियों द्वारा ही पहुँचाई गई थीं। पुलिस चार्जशीट में भी कई कानूनी खामियाँ थीं। इन तमाम तकनीकी और तथ्यात्मक कमियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार कर ली और सागर व टीकमगढ़ जेल में बंद रहे पिता और दोनों बेटों को तुरंत प्रभाव से दोषमुक्त करते हुए जितेंद्र को तत्काल जेल से रिहा करने का निर्देश दिया है।

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