शिवपुरी में तेजी से बढ़ा मक्का की खेती का रकबा, सोयाबीन को पीछे छोड़ किसानों की पहली पसंद बनी फसल
शिवपुरी जिले में मक्का की खेती का रकबा बढ़कर 90 हजार हेक्टेयर के पार पहुँच गया है। बेहतर मुनाफे के चलते किसानों का रुझान सोयाबीन से हटकर मक्का की तरफ बढ़ा है।
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में पिछले तीन वर्षों के दौरान मक्का की खेती के रकबे में अभूतपूर्व और तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहाँ वर्ष 2022 और 2023 के दौरान जिले में लगभग 17 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की बोवनी होती थी, वहीं वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर सीधे 58,644 हेक्टेयर पर पहुँच गया था, और अब यह वर्तमान में 90 हजार हेक्टेयर के आंकड़े को भी पार कर चुका है। मक्का की लगातार बढ़ती औद्योगिक मांग, हाइब्रिड किस्मों से मिलने वाली बंपर पैदावार और एथेनॉल निर्माण में इसके बढ़ते उपयोग को इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।
🌾 कोलारस और बदरवास बने मक्का उत्पादन के प्रमुख गढ़, सोयाबीन का रकबा घटा
इन आंकड़ों से यह साफ जाहिर होता है कि जिले के किसानों का रुझान पारंपरिक फसलों से हटकर अब मक्का की ओर तेजी से आकर्षित हुआ है। इस बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव कोलारस और बदरवास क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहाँ खरीफ सीजन के दौरान पारंपरिक रूप से बोई जाने वाली सोयाबीन की फसल का रकबा काफी कम हो गया है और उसकी जगह मक्का ने ले ली है। कृषि विभाग द्वारा इस वर्ष जिले में मक्का की बोवनी का लक्ष्य 1,33,500 हेक्टेयर रखा गया था, जिसके मुकाबले 90,352 हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी पूरी हो चुकी है, जो लक्ष्य का लगभग 67.67 प्रतिशत हिस्सा है।
💰 बेहतर पैदावार और बंपर मुनाफे के चलते किसानों की पहली पसंद बनी मक्का
कृषि विशेषज्ञों और किसानों के अनुसार, हाइब्रिड मक्का की पैदावार बेहद शानदार हो रही है, जिससे किसानों को प्रति हेक्टेयर 45 हजार से लेकर 95 हजार रुपये तक का शुद्ध मुनाफा मिल रहा है। यदि मक्का की औसत पैदावार 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और खेती की लागत 30 हजार रुपये मानी जाए, तो बाजार भाव के आधार पर किसानों को बहुत अच्छा आर्थिक लाभ मिल रहा है। इसके विपरीत, सोयाबीन की कम पैदावार और लगातार बढ़ती लागत के कारण किसानों को अपेक्षित मुनाफा नहीं मिल पा रहा था, जिसके चलते किसानों ने बड़े पैमाने पर मक्का की खेती की तरफ रुख करना शुरू कर दिया है।
🔬 एथेनॉल निर्माण और औद्योगिक मांग से मिल रहा बढ़ावा
शिवपुरी की सहायक संचालक कृषि विभाग डॉ. किरण रावत ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि मिलेट्स और पौष्टिक फसलों को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों के साथ-साथ मक्का की उच्च मांग के कारण पिछले तीन वर्षों में इसके रकबे में भारी इजाफा हुआ है। मक्का में स्टार्च की मात्रा प्रचुर होती है, जिसका उपयोग एथेनॉल उत्पादन और अन्य औद्योगिक कार्यों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। मौसम की अनिश्चितता के बावजूद मक्का की फसल मजबूत स्थिति में बनी हुई है, जिससे किसानों को बेहतर आय की उम्मीद है और जिले में कृषि अर्थव्यवस्था का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है।
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