मध्य प्रदेश में नकली और एनालॉग पनीर की बिक्री पर लगी रोक, पाम ऑयल और केमिकल से होता है तैयार
मध्य प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पाम ऑयल और केमिकल से बनने वाले एनालॉग पनीर की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने आम जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक बेहद बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में असली पनीर के नाम पर धड़ल्ले से बेचे जाने वाले 'एनालॉग पनीर' (Analog Paneer) की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। पाम ऑयल, स्टार्च, सस्ते वनस्पति तेल और विभिन्न केमिकल्स का इस्तेमाल करके तैयार किए जाने वाले इस नकली पनीर से सेहत को होने वाले गंभीर खतरों के चलते महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार ने भी यह सख्त कदम उठाया है।
🛒 असली पनीर के नाम पर चल रहा था खेल, मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने की घोषणा
मंगलवार को इंदौर में मीडिया से चर्चा करते हुए राज्य के चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने इस बात की आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने स्वीकार किया कि मध्य प्रदेश में उपभोक्ताओं को बिना किसी जानकारी के एनालॉग पनीर बेचा जा रहा है, जैसा कि हाल ही में छत्तीसगढ़ के रायपुर में भी सामने आया था। मंत्री ने बताया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के स्पष्ट निर्देश हैं कि एनालॉग पनीर की बिक्री केवल उचित पैकेजिंग और स्पष्ट रूप से यह लिखकर की जानी चाहिए कि यह 'एनालॉग पनीर' है। लेकिन इसे असली पनीर बताकर बेचने के कारण जनस्वास्थ्य पर बड़ा संकट मंडरा रहा था।
🔍 रक्षाबंधन के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा अभियान और सख्त कार्रवाई
त्योहारी सीजन खासकर रक्षाबंधन के अवसर पर आम जनता की सेहत से खिलवाड़ रोकने के लिए 20 जुलाई से खाद्य सुरक्षा अभियान के तहत डेयरी उत्पादों की सघन जाँच की जा रही है। सरकार द्वारा जल्द ही इसके औपचारिक प्रतिबंध के आदेश जारी कर दिए जाएंगे। इसके बाद मध्य प्रदेश में न तो एनालॉग पनीर की डंपिंग की जा सकेगी और न ही इसकी खुदरा या थोक बिक्री की अनुमति होगी। पड़ोसी राज्यों जैसे महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में पहले ही इस पर बैन लगाया जा चुका है, और अब एमपी में भी इसके अवैध कारोबारियों पर सख्त एक्शन की तैयारी है।
⚠️ क्या है एनालॉग पनीर और इससे सेहत को होने वाले गंभीर नुकसान?
आम तौर पर असली पनीर दूध से बनता है, लेकिन एनालॉग पनीर पूरी तरह से दूध के बजाय पाम ऑयल, सस्ते सोयाबीन तेल, स्टार्च और हानिकारक केमिकल्स से तैयार किया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक 'अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड' है, जिसके सेवन से हृदय रोग (दिल की बीमारियां), खराब कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि, मोटापा और पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं। इसमें मौजूद हानिकारक वसा और भारी स्टार्च पचने में बेहद कठिन होते हैं, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है। सरकार के इस कदम से अब राज्य के नागरिकों को मिलावटी और सेहत के लिए खतरनाक खाद्य पदार्थों से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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