क्यों कहा जाता है सागर को 'सिटी ऑफ लाइब्रेरियन'? जानें इस ऐतिहासिक विभाग की कहानी
डॉ. हरि सिंह गौर यूनिवर्सिटी, सागर का लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस डिपार्टमेंट देश को शीर्ष लाइब्रेरियन दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट से लेकर संसद तक में यहां के छात्र सेवाएं दे रहे हैं।
बुंदेलखंड जैसे पिछड़े और आदिवासी बहुल इलाके में देश की आजादी से पहले एक विश्व स्तरीय यूनिवर्सिटी की सौगात देने वाले महान शिक्षाविद् एवं न्यायविद् डॉ. सर हरि सिंह गौर के प्रयास आज मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। डॉ. गौर ने सागर यूनिवर्सिटी (Dr. Harisingh Gour University) में एक से बढ़कर एक बेहतरीन विभागों की स्थापना की और देश के चुनिंदा विद्वानों को उनकी कमान सौंपी। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज सागर यूनिवर्सिटी के विभिन्न विभागों के छात्र देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। ऐसा ही एक विशिष्ट विभाग 'लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस' (Library and Information Science) है, जिसकी स्थापना को लगभग 56 वर्ष हो चुके हैं और यहां के पूर्व छात्रों ने ऐसा अद्भुत मुकाम हासिल किया है कि लोग अब सागर को गर्व से 'सिटी ऑफ लाइब्रेरियन' कहने लगे हैं।
🏛️ 1962 में हुई थी शुरुआत, जानिए कैसे सफर तय कर 1970 में बना स्वतंत्र विभाग
सागर यूनिवर्सिटी में पुस्तकालय विज्ञान की पढ़ाई का इतिहास बेहद दिलचस्प है। इस शिक्षा की शुरुआत सबसे पहले वर्ष 1962 में पचमढ़ी स्थित एईसी (AEC) ट्रेनिंग कॉलेज को संबद्धता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी, जो 1995 तक सशस्त्र बलों के लिए विशेष रूप से लाइब्रेरियनशिप में स्नातक और प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम संचालित करता रहा। इसके अलावा रीवा का टीआरएस कॉलेज भी लंबे समय तक सागर यूनिवर्सिटी से संबद्ध रहा। अंततः डॉ. हरीसिंह गौर के जन्म शताब्दी वर्ष 1970 में यूनिवर्सिटी के भीतर एक अलग और स्वतंत्र 'लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस डिपार्टमेंट' की स्थापना की गई। शुरुआती दौर में सेंट्रल लाइब्रेरी से चलने वाला यह विभाग 1989 में अपने नए और स्वतंत्र भवन में शिफ्ट हो गया, जहाँ से आज बैचलर, मास्टर (M.Lib) और पीएचडी की डिग्रियां प्रदान की जा रही हैं।
🎓 देश के दिग्गज विद्वानों और गुरुओं के मार्गदर्शन से बुलंदियों पर पहुँचा विभाग
यह विभाग वर्ष 2008 तक कला संकाय के अधीन था और 2009 में इसे कला एवं सूचना विज्ञान संकाय (AIS) के अंतर्गत पुनर्गठित किया गया। इस विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने में यहाँ के समर्पित और विद्वान शिक्षकों का सबसे बड़ा योगदान रहा है। प्रो. एच.एस. सेंगर, प्रो. आर.जी. पाराशर, प्रो. के.सी. साहू और प्रो. जगतार सिंह जैसे दिग्गजों ने यहाँ अपनी अमूल्य सेवाएं दी हैं। छात्र प्यार से प्रो. आर.जी. पाराशर को 'बड़े गुरुजी' कहते थे (जो आज 92 वर्ष के हो चुके हैं), वहीं लाइब्रेरियन डॉ. हरिसिंह सेंगर और 'छोटे गुरुजी' प्रो. जे.के. मिश्रा की कड़ी मेहनत ने इस विभाग को देश भर में एक अलग पहचान दिलाई है।
🌍 लोकसभा, सुप्रीम कोर्ट से लेकर देश की शीर्ष यूनिवर्सिटी में दे रहे हैं सेवाएं
इस विभाग के पूर्व छात्र आज भारत के सबसे प्रतिष्ठित और सर्वोच्च संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सूची में संयुक्त राष्ट्र (UN), लोकसभा, राज्यसभा, दूरदर्शन, आकाशवाणी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, एनटीपीसी, एनआईटी, एनआईएफटी, रक्षा मंत्रालय, नीति आयोग, सुप्रीम कोर्ट, विभिन्न उच्च न्यायालयों के अलावा नेशनल लाइब्रेरी कोलकाता, संस्कृति मंत्रालय, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी, आईसीएआर (ICAR), आईआईटी (IIT), और केंद्रीय व नवोदय विद्यालय शामिल हैं। इसके अलावा बीएचयू (BHU), जेएनयू (JNU), दिल्ली यूनिवर्सिटी, आईपी यूनिवर्सिटी, पंजाब यूनिवर्सिटी और कृषि यूनिवर्सिटी रायपुर जैसी नामी-गिरामी यूनिवर्सिटी में भी यहाँ के छात्र उच्च पदों पर कार्यरत हैं।
📈 MPPSC लाइब्रेरियन भर्ती में लहराया परचम, कुल चयन का 20 फीसदी हिस्सा सागर के नाम
हाल ही में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा लाइब्रेरियन के 177 पदों पर की गई भर्ती परीक्षा में सागर यूनिवर्सिटी के छात्र और पूर्व छात्रों ने शानदार सफलता हासिल करते हुए 39 सीटों पर कब्जा जमाया है। यह कुल चयन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है। इससे पहले 2019 की परीक्षा में भी 76 स्टूडेंट्स सफल हुए थे, और 1993 में तो एक साथ 22 छात्रों का चयन हुआ था। संसद के पुस्तकालय में संयुक्त निदेशक के रूप में कार्यरत 1997 बैच के छात्र बलराम साहू, बीएचयू के डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ. संजीव सराफ और डीयू के डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ. सोमेश विश्वकर्मा जैसे दिग्गजों का मानना है कि डॉ. गौर का सपना आज इन्हीं छात्रों के जरिए साकार हो रहा है।
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