श्योपुर में रेत माफियाओं का आतंक: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाकर जारी है अवैध खनन, प्रशासन मौन

श्योपुर में अवैध रेत और पत्थर खनन का कारोबार जोरों पर। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद भी माफिया बेखौफ। सांसद के बयान के बाद बढ़ी सियासी हलचल।

Jun 8, 2026 - 15:29
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श्योपुर में रेत माफियाओं का आतंक: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाकर जारी है अवैध खनन, प्रशासन मौन

श्योपुर। जिले में रेत और पत्थर माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें अब न कानून का डर है, न प्रशासन का और न ही सुप्रीम कोर्ट का। चंबल और स्थानीय नदियों का सीना छलनी कर अवैध रेत खनन और पत्थर निकालने का कारोबार खुलेआम जारी है। विजयपुर, गसवानी, वीरपुर, ढोढर, ओछापुरा, रघुनाथपुर, मानपुर और दुर्गापुरी जैसे इलाकों में हर दिन खनिज संपदा की लूट हो रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग मौन साधे हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में यह काला कारोबार इतना फल-फूल रहा है? इसी बीच रविवार रात मुरैना-श्योपुर सांसद के बयान ने नई बहस को जन्म दे दिया है।

 अवैध उत्खनन पर सांसद मंगल सिंह तोमर का विवादास्पद बयान

जब इस पूरे मामले में मुरैना-श्योपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद मंगल सिंह तोमर से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "क्षेत्र में अवैध उत्खनन रोकने के लिए बनाई गई पुलिस चौकियों के बावजूद गड़बड़ियां जारी हैं और सब कुछ चल रहा है। इस मामले की जांच कराएंगे और कलेक्टर से भी चर्चा हो चुकी है।" उन्होंने आगे कहा कि "भविष्य में यदि कुछ लोगों को अनुमति मिलती है, तो उससे व्यापारियों, मजदूरों और सरकार को राजस्व का लाभ भी हो सकता है।" सांसद के इस बयान के अब अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं, जिसे लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

 सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी नहीं हो रही परवाह

श्योपुर में अवैध खनन का खेल किसी से छिपा नहीं है। चंबल और अन्य नदियों से दिन-रात रेत निकाली जा रही है और पहाड़ियों से पत्थर का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर सड़कों पर खुलेआम दौड़ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर प्रशासन सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। यही वजह है कि पुलिस विभाग, खनिज विभाग और संबंधित एजेंसियों पर रेत माफियाओं को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा चंबल क्षेत्र में खनन को लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं, इसके बावजूद जिले में यह अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है।

अंधेरे की आड़ में चलता है काला कारोबार

आरोप यह भी है कि जिले के कई इलाकों में रात के अंधेरे का फायदा उठाकर खनन का खेल बड़े पैमाने पर चलता है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहते हैं। खनिज संपदा की यह लूट न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचा रही है, बल्कि शासन को भी राजस्व की बड़ी चपत लगा रही है। अब देखना यह होगा कि सांसद के आश्वासन के बाद प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है या यह मामला महज फाइलों में ही दबा रह जाएगा।

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