शहडोल में सड़क बनी पर पुल बनाना भूल गया प्रशासन, घोघरी नदी पार करने को मजबूर ग्रामीण और स्कूली बच्चे
शहडोल के बुढ़ार में 207 लाख की लागत से सड़क तो बन गई लेकिन पुल नहीं बनाया गया। घोघरी नदी पार करने को मजबूर ग्रामीण और बच्चों की समस्या पर कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं।
मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों से अक्सर विकास के दावों की पोल खोलती तस्वीरें सामने आती रहती हैं। कहीं अस्पताल नहीं हैं, कहीं स्कूल भवन जर्जर हैं तो कहीं पुल न होने के कारण लोगों का जीवन संकट में है। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला शहडोल जिले के बुढ़ार जनपद से सामने आया है, जहाँ प्रशासनिक लापरवाही के चलते बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्गों तक को हर दिन उफनती नदी के पानी से गुजरकर स्कूल और बाजार जाना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि बच्चे गुहार लगा रहे हैं कि "साहब, पुलिया बनवा दो, हमें भी पढ़-लिखकर कलेक्टर बनना है।"
🛣️ सड़क तो बन गई 4.8 किलोमीटर, लेकिन बीच रास्ते से गायब है पुलिया
शहडोल के जनपद पंचायत बुढ़ार के अंतर्गत टेंघा से छिनमार गांव तक 4.8 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन रास्ते में पड़ने वाली घोघरी नदी पर पुल का निर्माण करना ही विभाग भूल गया। पुल न होने के कारण स्थानीय लोगों का जनजीवन बेहद नरकीय हो गया है। बरसात के दिनों में जब नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो छिनमार, गोडिनबुड़ा और नागिन गांवों का संपर्क टेंघा व अन्य शहरी इलाकों से पूरी तरह कट जाता है। इसका सबसे बुरा असर उन मासूम बच्चों पर पड़ रहा है जो स्कूल जाते हैं और उन मरीजों पर जिन्हें समय पर अस्पताल पहुँचना होता है।
⚠️ विभागीय बोर्ड पर लिखी चेतावनी, ग्रामीण बोले- जब खतरा पता था तो पुल क्यों नहीं बनाया
मौके पर लगाए गए विभागीय बोर्ड के अनुसार, माध्यमिक विद्यालय टेंघा से छिनमार मार्ग का यह निर्माण कार्य 207.56 लाख रुपये की लागत से 1 अप्रैल 2025 को शुरू हुआ था और इसे 30 अक्टूबर 2026 तक पूरा होना है। हैरानी की बात यह है कि लोक निर्माण विभाग ने नदी के पास खुद एक चेतावनी बोर्ड लगाया है जिस पर लिखा है— "सावधान, घोघरी नदी में पानी अधिक होने पर पुल पार ना करें।" स्थानीय ग्रामीण रामलाल ने सवाल उठाया कि जब विभाग को पहले से ही खतरे का अहसास था, तो उन्होंने पुल का निर्माण क्यों नहीं कराया? सड़क बन गई लेकिन जिसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, वही पुलिया गायब है।
🎒 "पुलिया बनवा दो सरकार", जान जोखिम में डालकर पढ़ने जाते हैं मासूम बच्चे
सड़क बनने के बाद भी पुलिया न होने से सबसे बड़ी मुसीबत स्कूली बच्चों के सामने खड़ी हो गई है, जो एक गांव से दूसरे गांव पढ़ाई करने जाते हैं। छोटे-छोटे बच्चों को इस बरसाती नदी को पार करके स्कूल जाना पड़ता है, जहाँ कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। बारिश के दिनों में जलस्तर बढ़ने पर बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो जाती है। ग्रामीण सुनील यादव ने बताया कि गोंडिनबुड़ा-टेंघा मार्ग पर सड़क तो बन गई लेकिन पुल न होने से स्थिति बेहद गंभीर है। यदि कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाए तो एंबुलेंस या निजी वाहन भी यहाँ तक नहीं पहुँच सकते। मामले के तूल पकड़ने पर शहडोल कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को त्वरित जांच के आदेश दे दिए हैं।
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