रतलाम में नए सत्र के ढाई महीने बाद भी नहीं मिली स्कूल ड्रेस, स्वतंत्रता दिवस पर पुरानी पोशाक पहनेंगे बच्चे
रतलाम में नए शिक्षा सत्र के ढाई महीने बीत जाने के बाद भी कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को स्कूल ड्रेस नहीं मिल पाई है। नीति में बदलाव के कारण इस बार स्वतंत्रता दिवस पर बच्चे पुरानी ड्रेस में शामिल होंगे।
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से शिक्षा व्यवस्था की एक बड़ी लापरवाही सामने आ रही है, जहाँ नया शिक्षा सत्र शुरू हुए ढाई महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन कक्षा पहली से आठवीं तक के शासकीय स्कूलों के बच्चों को मिलने वाली निशुल्क स्कूल ड्रेस (गणवेश) का अब तक कोई अता-पता नहीं है। राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इस बार गणवेश वितरण की नीति में किए गए अचानक बदलाव के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। नतीजतन, रतलाम जिले के लगभग 1 लाख 17 हजार छात्र-छात्राएं इस बार स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व पर भी नई ड्रेस के बजाय अपनी पुरानी स्कूल ड्रेस पहनकर ही कार्यक्रमों में शामिल होने को मजबूर होंगे। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा मामला फिलहाल शासन स्तर पर लंबित है।
🔄 डीबीटी की जगह रेडीमेड ड्रेस देने के निर्देश से अटका मामला, पोर्टल पर दर्ज है जानकारी
मध्य प्रदेश में कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को निशुल्क स्कूल ड्रेस उपलब्ध कराने की योजना वर्ष 2004 से लगातार लागू है, हालांकि समय-समय पर इसकी व्यवस्था में बदलाव होते रहे हैं। इस वर्ष से पहले तक बच्चों के बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे स्कूल ड्रेस की राशि भेजी जाती थी, जिसके तहत प्रत्येक छात्र को दो जोड़ी ड्रेस के लिए 600 रुपये दिए जाते थे। लेकिन इस बार शिक्षा विभाग ने नियमों में बदलाव करते हुए बच्चों को सीधे स्कूलों के माध्यम से रेडीमेड गणवेश उपलब्ध कराने के निर्देश जारी कर दिए। शिक्षा केंद्र के सहायक परियोजना समन्वयक विवेक नागर ने बताया कि जिले के 1,17,600 छात्रों की जानकारी पोर्टल पर पहले ही दर्ज की जा चुकी है, लेकिन अंतिम निर्णय शासन स्तर से ही होना है।
⏳ प्रशासनिक लेटलतीफी का खामियाजा भुगत रहे मासूम विद्यार्थी
शासन और शिक्षा विभाग के बीच आपसी समन्वय की कमी और प्रशासनिक सुस्ती के कारण सरकारी स्कूलों के इन नौनिहालों को सत्र शुरू होने के इतने दिन बाद भी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। अधिकारियों द्वारा पोर्टल पर बैंक डिटेल्स और बच्चों की संख्या पहले ही अपलोड की जा चुकी है, इसके बावजूद नीतिगत असमंजस के कारण प्रक्रिया ठंडे बस्ते में पड़ी है। इस बार के स्वतंत्रता दिवस पर जब बच्चे अन्य निजी स्कूलों के बच्चों को नई और आकर्षक पोषाकों में देखेंगे, तो सरकारी स्कूलों के इन बच्चों की पुरानी और घिसी-पिटि ड्रेस व्यवस्था की पोल खोलती हुई नजर आएगी।
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