छात्रों की शिकायतों को नजरअंदाज करना पड़ा भारी, जर्जर भवन में जान जोखिम में डाल रहे छात्र
श्योपुर के अनुसूचित जनजाति पोस्ट मैट्रिक छात्रावास की छत का मलबा गिरने से एक छात्र घायल हो गया। छात्र लंबे समय से जर्जर भवन की शिकायत कर रहे थे।
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के अनुसूचित जनजाति विभाग के पोस्ट मैट्रिक छात्रावास में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब छात्रावास के जर्जर भवन की छत का भारी प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा। यह घटना उस समय हुई जब छात्र अपने कमरों में सो रहे थे। मलबे की चपेट में आने से एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि अन्य छात्र जान बचाकर बाहर की ओर भागे। छात्रावास के छात्रों का कहना है कि यह पूरा भवन जर्जर अवस्था में है और अधिकारी उनकी शिकायतों को लगातार अनसुना कर रहे हैं।
⚠️ शिकायतों के बाद भी प्रशासन मौन, जान जोखिम में डाल रहे छात्र
मंगलवार को हुई इस घटना के बाद छात्रों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका आरोप है कि वे लंबे समय से जर्जर भवन की मरम्मत या नई बिल्डिंग में शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों ने कोई ध्यान नहीं दिया। न केवल छत का प्लास्टर गिरना, बल्कि छात्रावास में शौचालयों की बदहाली, वाटर कूलर का खराब होना और नलों से कंकड़ युक्त पानी आना छात्रों के लिए बड़ी मुसीबत बना हुआ है। घटना के बाद अनुसूचित जनजाति विभाग के अधिकारी आरके गुप्ता मौके पर पहुँचे और निरीक्षण के बाद छात्रों को कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
🪖 छात्रों का दर्द— "हमें कीड़ों-मकोड़ों की तरह समझा जा रहा है"
घटना के प्रत्यक्षदर्शी छात्र रवि कुमार ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "जिस समय छत का मलबा गिरा, मैं उसी कमरे में मौजूद था। अगर कोई बड़ी जनहानि होती तो इसका जिम्मेदार कौन होता?" छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल में साफ-सफाई का भी घोर अभाव है और सीवर लाइनें बंद पड़ी हैं। छात्रों का कहना है कि उन्हें हॉस्टल में कीड़ों-मकोड़ों की तरह रखा जा रहा है। संतोष जाटव नामक छात्र ने बताया कि कई बार आवेदन देने के बावजूद किसी अधिकारी ने निरीक्षण की जहमत नहीं उठाई।
🧱 अधीक्षक का कबूलनामा: पुरानी मरम्मत भी रही नाकाम, छात्रों को किया गया शिफ्ट
छात्रावास अधीक्षक जगजीवन जाटव ने स्वीकार किया कि छात्रावास भवन बहुत पुराना और जर्जर हो चुका है। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी इस भवन के मेंटेनेंस के लिए 3 लाख रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन मरम्मत का काम ठीक से नहीं हो पाया। अब इस घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया है और संबंधित कमरे में रह रहे छात्रों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है। अधीक्षक ने भी विभाग से छात्रों को किसी सुरक्षित जगह पर शिफ्ट करने की दोबारा मांग की है ताकि किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सके।
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