Indore Metro News: 18 जून से दौड़ेगी मेट्रो, बस से 30 और मेट्रो से 80 रुपये का होगा सफर
इंदौर में 18 जून से 17 किमी मेट्रो सफर की शुरुआत। किराया 80 रुपये तय, जो दिल्ली-लखनऊ से महंगा है। बस के मुकाबले मेट्रो का सफर महंगा, फीडर बसों की कमी।
इंदौर। शहरवासियों के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित इंदौर मेट्रो का सफर 18 जून से शुरू होने वाला है। सुपर कॉरिडोर के गांधी नगर स्टेशन से रेडिसन चौराहे स्थित मालवीय नगर स्टेशन तक करीब 17 किलोमीटर की दूरी में 16 मेट्रो स्टेशन बनाए गए हैं। हालांकि, इस मेट्रो का किराया शहरवासियों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। इस 17 किमी की दूरी तय करने के लिए यात्रियों को 80 रुपये का शुल्क देना होगा।
किराए की विसंगति: अन्य शहरों से तुलना
इंदौर और भोपाल मेट्रो के लिए निर्धारित दरें दिल्ली और लखनऊ जैसे बड़े शहरों की तुलना में काफी अधिक हैं। एक तुलनात्मक आंकड़े के अनुसार:
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इंदौर मेट्रो: 17 किलोमीटर (15-16 स्टेशन) का किराया 80 रुपये है।
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लखनऊ मेट्रो: इतनी ही दूरी के लिए यात्रियों को मात्र 50 रुपये देने होते हैं।
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दिल्ली मेट्रो: समान दूरी के लिए किराया केवल 42 रुपये है। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि यह किराया पूर्व निर्धारित है और भविष्य में किराया निर्धारण समिति यात्रियों की संख्या के आधार पर इसे संशोधित करने पर विचार कर सकती है।
समय की बचत बनाम जेब पर बोझ
सेप्ट यूनिवर्सिटी और एशियन डेवलपमेंट बैंक की स्टडी के अनुसार, जो सफर सिटी बस से रेडिसन से एयरपोर्ट तक तय करने में 1 से 1.5 घंटे का समय लेता है, वही मेट्रो के माध्यम से महज 30 मिनट में पूरा हो जाएगा। जहाँ सिटी बस का किराया इस दूरी के लिए मात्र 30 रुपये है, वहीं मेट्रो के लिए यात्रियों को 80 रुपये खर्च करने होंगे। कम समय में गंतव्य तक पहुँचने की सुविधा तो मिलेगी, लेकिन इसके लिए यात्रियों को ढाई गुना अधिक किराया चुकाना होगा।
कनेक्टिविटी के लिए फीडर बसों का इंतजार
18 जून से मेट्रो सेवा शुरू करने की तैयारी तो है, लेकिन मेट्रो स्टेशनों को सिटी बस सेवा से कनेक्ट करने वाली 'फीडर बसें' अभी तक एक चुनौती बनी हुई हैं। अभी तक इन बसों के रूट तय नहीं हुए हैं। यदि रेडिसन चौराहे से खजराना और गांधी नगर स्टेशन से एयरपोर्ट, कालानी नगर व छोटा बांगड़दा तक फीडर बसें नहीं चलती हैं, तो यात्रियों के लिए स्टेशन तक पहुँचना मुश्किल होगा।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने लखनऊ मेट्रो का 'फेयर मॉडल' अपनाया है और अभी फिक्स फेयर तय किया गया है। भविष्य में स्थिति और यात्रियों की प्रतिक्रिया को देखते हुए किराया निर्धारण कमेटी इस पर फिर से विचार कर सकती है। अब देखना यह है कि इतने महंगे किराए के बावजूद इंदौर के यात्री बसों के मुकाबले मेट्रो को कितना पसंद करते हैं।
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