जबलपुर बरगी डेम क्रूज हादसा: न्यायिक जांच में सामने आई गंभीर लापरवाही, फिटनेस और बीमा में बड़ा फर्जीवाड़ा

जबलपुर के बरगी डेम क्रूज हादसे की न्यायिक जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और बीमा फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा। प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल।

Jun 8, 2026 - 20:25
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जबलपुर बरगी डेम क्रूज हादसा: न्यायिक जांच में सामने आई गंभीर लापरवाही, फिटनेस और बीमा में बड़ा फर्जीवाड़ा

जबलपुर। बरगी डेम में 30 अप्रैल 2026 को हुए भीषण क्रूज हादसे की न्यायिक जांच के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी से जुड़ी गंभीर खामियां सामने आई हैं। हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की अध्यक्षता वाले न्यायिक आयोग के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों और हलफनामों ने क्रूज संचालन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। याचिकाकर्ता अखिलेश त्रिपाठी ने अधिवक्ता पंकज दुबे के माध्यम से जो दस्तावेज पेश किए हैं, वे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं।

 फिटनेस और बीमा के बिना चल रहा था क्रूज

प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त क्रूज के पास वैध यात्री बीमा नहीं था। आरोप है कि क्रूज संचालक ने प्रशासन को गुमराह करने के लिए 'मैकल रिसॉर्ट' की पुरानी बीमा पॉलिसी का उपयोग किया। इसके अलावा, 'मध्य प्रदेश अंतर्देशीय भाप पोत नियम, 1962' के तहत अनिवार्य फिटनेस सर्वे भी नहीं कराया गया था। साथ ही, 'अंतर्देशीय पोत अधिनियम, 2022' के प्रावधानों का पालन न करना यात्रियों की सुरक्षा के साथ बड़ा खिलवाड़ माना जा रहा है। अब सवाल यह है कि बिना फिटनेस और बीमा के व्यावसायिक संचालन की अनुमति किसने दी?

 मौसम विभाग की चेतावनी को दी गई अनदेखी

जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि जिस दिन यह हादसा हुआ, मौसम विभाग ने तेज आंधी और खराब मौसम को लेकर पहले ही चेतावनी जारी कर दी थी। इसके बावजूद क्रूज प्रबंधन ने पर्यटकों को जलाशय के भीतर ले जाने का जोखिम उठाया। सुरक्षा प्रोटोकॉल की ऐसी घोर अनदेखी ने दुर्घटना की तीव्रता को और बढ़ा दिया।

आयोग के तीखे सवाल और जांच का बढ़ता दायरा

सूत्रों के अनुसार, न्यायिक आयोग ने संबंधित अधिकारियों और क्रूज प्रबंधन से कड़े सवाल पूछे हैं। सुरक्षा मानकों के उल्लंघन, बीमा अनियमितताओं और मौसम अलर्ट को नजरअंदाज करने के मामलों में अधिकारियों के जवाब अब तक संतोषजनक नहीं रहे हैं। जांच अब केवल दुर्घटना के कारणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाओं की भूमिका पर केंद्रित है, जिनकी लापरवाही के कारण यात्रियों की जान खतरे में पड़ी। यह स्पष्ट है कि यह मामला प्रशासनिक विफलता की एक बड़ी श्रृंखला की ओर इशारा कर रहा है।

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