महावीर चक्र विजेता दिगेंद्र सिंह का बड़ा बयान, कहा- कारगिल युद्ध में लाहौर तक जाने वाली थी सेना

महावीर चक्र विजेता दिगेंद्र सिंह ने इंदौर में कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान सेना लाहौर तक बढ़ने वाली थी लेकिन सरकार ने रोक दिया। उन्होंने अग्निवीर योजना पर भी सवाल उठाए।

Aug 13, 2026 - 18:22
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महावीर चक्र विजेता दिगेंद्र सिंह का बड़ा बयान, कहा- कारगिल युद्ध में लाहौर तक जाने वाली थी सेना

देश में अपनी अदम्य वीरता और अर्तराष्ट्रीय पहचान के लिए जाने जाने वाले कारगिल युद्ध के नायक और महावीर चक्र विजेता दिगेंद्र कुमार सिंह ने सैन्य गतिविधियों में बढ़ते राजनीतिक दखल पर गहरी निराशा जताई है। इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान उन्होंने कारगिल युद्ध के अनछुए पहलुओं पर खुलकर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि कारगिल युद्ध के समय भारतीय सेना ने पाकिस्तान को करारा सबक सिखाते हुए लाहौर तक पहुंचने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन तत्कालीन सरकार द्वारा अचानक सीजफायर (युद्धविराम) घोषित किए जाने के कारण सेना को पीछे हटना पड़ा था।

🏔️ तोलोलिंग पहाड़ी पर फहराया था तिरंगा, राजनेताओं पर साधा निशाना

कारगिल युद्ध के दौरान जम्मू-कश्मीर की बेहद दुर्गम और बर्फीली 'तोलोलिंग' पहाड़ी को दुश्मनों के चंगुल से मुक्त कराकर वहां तिरंगा फहराने वाले नायक दिगेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि युद्ध के दौरान अक्सर आर्मी इंटेलिजेंस और सेना नहीं, बल्कि राजनेता फेल हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि 26 जुलाई को उनकी रेजिमेंट ने दुश्मन की सारी पोस्ट खाली कराकर सीधे पाकिस्तान की सीमा में आगे बढ़ने का ऐतिहासिक फैसला किया था, लेकिन सरकारी निर्देशों के आगे सेना को रुकना पड़ा। इसके अलावा, उन्होंने पैरामिलिट्री फोर्स की पेंशन बंद किए जाने और सरकार की 'अग्निवीर' योजना पर भी कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि चार साल की अवधि में अग्निवीर सैनिक अपनी पूरी क्षमता और 'अग्नि' का प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं और एक ट्रेंड सैनिक तैयार करने में सरकार के करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद उन्हें भविष्य में तंगी का सामना करना पड़ता है।

🇨🇳 चीन को लेकर दो-टूक और आधुनिक युद्ध तकनीक पर जोर

चीन की घुसपैठ की कोशिशों पर बात करते हुए दिगेंद्र सिंह ने कहा कि चीन को सबक सिखाने का सबसे कारगर तरीका यह है कि देश में चीनी सामान का पूर्ण रूप से बहिष्कार कर दिया जाए, जिससे चीन खुद-ब-खुद भारतीय सीमा में दखल देना बंद कर देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सरकार आदेश दे, तो भारतीय सेना चीनी सीमा के भीतर 60 किलोमीटर अंदर तक घुसने में पूरी तरह सक्षम है। आधुनिक युद्ध के स्वरूप पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज युद्ध की तकनीक तेजी से बदल रही है और अब ड्रोन के जरिए जंग लड़ी जा रही है, इसलिए देश को सैन्य तैयारियों और सैनिकों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर होने की जरूरत है। इस गरिमामयी कार्यक्रम में उनके साथ लेफ्टिनेंट कर्नल सुरेंद्र सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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