MP Rajya Sabha Polls: भाजपा का दावा 'अंतरात्मा की आवाज पर मिलेंगे वोट', कांग्रेस ने लगाया खरीद-फरोख्त का आरोप
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में सियासी हलचल। भाजपा द्वारा तीसरी सीट पर प्रत्याशी उतारने से हार्स ट्रेडिंग का आरोप। प्रत्याशियों की संपत्ति का विवरण पढ़ें।
भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान तीसरी सीट पर संख्या बल न होने के बावजूद भाजपा द्वारा उम्मीदवार उतारे जाने के बाद से राजनीति गरम हो गई है। प्रदेश में एक बार फिर 'हार्स ट्रेडिंग' (विधायकों की खरीद-फरोख्त) के आरोपों ने जोर पकड़ लिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दावा किया कि वे 'अंतरात्मा की आवाज' पर मिलने वाले वोटों का स्वागत करेंगे, जबकि कांग्रेस इसे लोकतंत्र की हत्या करार दे रही है।
भाजपा-कांग्रेस का आरोप-प्रत्यारोप
पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि भाजपा धनबल और दबाव की राजनीति कर रही है। सिंघार ने कहा, "भाजपा के पास बहुमत नहीं है, फिर भी उन्होंने तीसरा उम्मीदवार उतारा है, जिसका उद्देश्य हमारे विधायकों को खरीदना है।" इसके जवाब में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि कांग्रेस को बेचैन होने की जरूरत नहीं है; उन्हें अपनी पार्टी के भीतर झांकना चाहिए। वहीं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि भाजपा के पास अतिरिक्त वोट हैं और वे विकास के एजेंडे के साथ चुनाव लड़ रहे हैं।
उम्मीदवारों की संपत्ति का लेखा-जोखा
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महेश केवट (भाजपा प्रत्याशी): महेश केवट ने मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके शपथ पत्र के अनुसार, उनके पास लगभग 2.53 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है। उनकी कुल चल संपत्ति (स्वयं और पत्नी) लगभग 27 लाख रुपये है। केवट का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और आय का मुख्य स्रोत व्यवसाय है।
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मीनाक्षी नटराजन (कांग्रेस प्रत्याशी): इनके पास कोई कृषि भूमि या आवासीय भवन नहीं है। हालांकि, उनके पास निवेश, बैंक बैलेंस और गहनों को मिलाकर कुल संपत्ति 1.35 करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने भी अपने शपथ पत्र में किसी आपराधिक रिकॉर्ड का उल्लेख नहीं किया है।
बाड़ाबंदी पर सियासी बयानबाजी
कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस की 'बाड़ाबंदी' पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं है, इसलिए उन्हें प्रदेश से बाहर ले जाया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा के विधायक और अन्य समर्थक डंके की चोट पर उनके प्रत्याशी को वोट देंगे। फिलहाल, इस चुनाव ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर असमंजस और आरोप-प्रत्यारोप के चौराहे पर खड़ा कर दिया है।
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