केन-बेतवा परियोजना के प्रभावित आदिवासियों ने दिल्ली में राहुल गांधी से की मुलाकात, उठाया विस्थापन का मुद्दा
केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रभावित आदिवासियों ने दिल्ली पहुंचकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। आदिवासियों ने विस्थापन और मुआवजे की मांग उठाई है।
मध्य प्रदेश में महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ आंदोलन कर रहे प्रभावित आदिवासियों ने अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का रुख किया है। प्रभावित आदिवासियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली पहुंचकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। इस दौरान आदिवासियों ने राहुल गांधी के सामने परियोजना के कारण हो रहे विस्थापन, उचित मुआवजा न मिलने और पुनर्वास से जुड़ी तमाम गंभीर समस्याओं को विस्तार से रखा। मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि यह परियोजना आदिवासियों से उनके जल, जंगल और जमीन तो छीन ही रही है, साथ ही सैंकड़ों सालों से उनके आशियाने रहे गांव भी डूब क्षेत्र में आ रहे हैं, जिससे उनके घर उजड़ रहे हैं और उन्हें मजबूरन आंदोलन की राह अपनानी पड़ रही है।
⚖️ राहुल गांधी का बीजेपी सरकार पर हमला, कहा- संवाद की बजाय चुना गया अन्याय का रास्ता
प्रभावित आदिवासियों से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण सत्याग्रह करने के बावजूद पुलिस बल का प्रयोग करके आदिवासियों के विरोध प्रदर्शन का अधिकार छीना गया है। बीजेपी सरकार ने एक बार फिर संवाद का मार्ग छोड़कर अन्याय का रास्ता चुना है। उन्होंने कहा कि सरकारी विकास योजनाओं के नाम पर यदि किसी के घर और गांव उजाड़े जाते हैं, तो न्यायपूर्ण मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास मांगना उनका पूरी तरह से जायज हक है। राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जल, जंगल और जमीन सिर्फ प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि आदिवासी समाज की पूरी जीवन रेखा हैं। देश के पहले मालिकों के इस सम्मान और न्याय के संघर्ष में वे और पूरी कांग्रेस पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
📢 आदिवासी कांग्रेस बोली- बीजेपी सरकार आदिवासी विरोधी, पेसा कानून के क्रियान्वयन पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम ने सत्तारूढ़ बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए उसे 'आदिवासी विरोधी' करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में 9 अगस्त को 'विश्व आदिवासी दिवस' मनाया गया, लेकिन बीजेपी के प्रांतीय नेतृत्व से लेकर किसी भी शीर्ष नेता ने आदिवासियों को इसकी शुभकामनाएं तक देना उचित नहीं समझा। उन्होंने कहा कि सरकार पेसा (PESA) कानून लागू करने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका सही क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रभावितों को अब तक न्याय नहीं मिलने के कारण उन्हें लगातार धरना-प्रदर्शन करना पड़ रहा है। इसके अलावा, उन्होंने बालाघाट में बैगा आदिवासियों की दूषित पानी पीने से हुई मौतों, प्रदेश के आदिवासी छात्रावासों की बदहाल स्थिति और सरकारी आईटीआई संस्थानों को निजी हाथों में सौंपने जैसे गंभीर मुद्दों को उठाते हुए सरकार पर आदिवासियों के अधिकारों और आरक्षण को कमजोर करने का आरोप लगाया है।
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