सरकार की चलित पशु चिकित्सालय योजना से बची हजारों पशुओं की जान, जानिए कैसे उठाएं लाभ
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मोबाइल वेटरनरी यूनिट (1962) के जरिए पशुपालक घर बैठे बीमार और घायल पशुओं का इलाज करवा सकते हैं। जानिए इस योजना की पूरी जानकारी।
दुधारू पशु पालने वाले किसानों और शौकिया तौर पर घर में जानवर रखने वाले लोगों के लिए एक बेहद काम की खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में 'मोबाइल वेटरनरी यूनिट' (MVU) यानी चलित पशु चिकित्सालय का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। आम नागरिक इस बेहतरीन सुविधा का लाभ उठाने के लिए केवल एक टोल-फ्री नंबर 1962 का उपयोग कर सकते हैं। इस सेवा के माध्यम से बीमार या घायल पशुओं के इलाज के लिए डॉक्टर और पूरी टीम सीधे पशुपालक के घर तक पहुंचती है। केवल जबलपुर जिले की बात करें, तो बीते एक साल में लगभग 9,446 पशुओं की जान इसी चलित चिकित्सा सेवा की वजह से बचाई जा चुकी है।
📞 ऐसे काम करती है मोबाइल वेटरनरी यूनिट (MVU), 90% दवाइयां होती हैं गाड़ी में उपलब्ध
जबलपुर पशुपालन विभाग की उपसंचालक डॉ. ज्योति तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि पशुपालन विभाग द्वारा संचालित इस सेवा के तहत कोई भी पशुपालक 1962 नंबर पर फोन करके अपनी शिकायत या टिकट जनरेट करवा सकता है। टोल-फ्री नंबर पर कॉल करते ही संबंधित क्षेत्र के डॉक्टर का नंबर पशुपालक के पास पहुंच जाता है, जिससे वे फोन पर ही प्राथमिक सलाह ले सकते हैं और जरूरत पड़ने पर चलित अस्पताल को अपने घर बुला सकते हैं। इस मोबाइल यूनिट में एक योग्य पशु चिकित्सक, एक ड्राइवर और वेटरनरी की ट्रेनिंग प्राप्त एक हेल्पर मौजूद होता है। इस गाड़ी के अंदर ही पशुओं से जुड़ी लगभग 90% जरूरी दवाइयां उपलब्ध रहती हैं, जिससे मौके पर ही तुरंत इलाज शुरू किया जा सके।
💰 तय की गई है मामूली फीस, आवारा और घायल जानवरों का भी होता है इलाज
यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क नहीं है, बल्कि इसके लिए बहुत ही मामूली शुल्क निर्धारित किया गया है। गाय या भैंस के इलाज के लिए 150 रुपए और शहरों में पाले जाने वाले कुत्ते या बिल्ली के इलाज के लिए 300 रुपए की फीस तय की गई है, जिसका उपयोग पशु कल्याण समिति के कार्यों में किया जाता है। वर्तमान में जबलपुर के सभी 8 ब्लॉकों में 8 मोबाइल यूनिट्स सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। इसके अलावा, यह मोबाइल यूनिट शहर में सड़क पर घायल होने वाले आवारा पशुओं की मदद के लिए भी आगे आती है। यदि आसपास के लोग किसी घायल आवारा जानवर की सूचना 1962 पर देते हैं, तो यह टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर उसका उपचार करती है।
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