भोपाल की नवाबी संपत्तियों पर छिड़ा विवाद: 1370 एकड़ जमीन की दोबारा होगी जांच, मर्जर एग्रीमेंट को बनाया आधार
भोपाल में नवाबी संपत्तियों और शत्रु संपत्ति को लेकर नया विवाद। मर्जर एग्रीमेंट के आधार पर 1370 एकड़ भूमि की जांच की मांग।
भोपाल। भोपाल में अरबों रुपये मूल्य की नवाबी संपत्तियों और शत्रु संपत्ति को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। नवाब परिवार से जुड़ी जमीनों के रिकॉर्ड की दोबारा गहन जांच कराने की मांग तेज हो गई है। प्रशासन को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें वर्ष 1949 में भारत सरकार और तत्कालीन भोपाल रियासत के बीच हुए 'मर्जर एग्रीमेंट' को जांच का मुख्य आधार बनाने की मांग की गई है। इस विवाद में अभिनेता सैफ अली खान, शर्मिला टैगोर और उनके परिवार के अन्य सदस्यों की संपत्तियां भी चर्चा में हैं।
जांच के लिए बनी समिति, नए तथ्यों पर उठ रहे सवाल
भोपाल में शत्रु संपत्तियों की पहचान और सत्यापन के लिए कस्टोडियन विभाग के निर्देश पर पहले से ही एक जांच प्रक्रिया चल रही है, जिसके लिए कलेक्टर द्वारा एक विशेष समिति का गठन भी किया गया है। इसी कड़ी में समाजसेवी अमिताभ अग्निहोत्री ने अपर जिला मजिस्ट्रेट (ADM) सुमित कुमार पांडे को ज्ञापन सौंपा है। इसमें मांग की गई है कि 29 अप्रैल 1949 को हुए मर्जर एग्रीमेंट में दर्ज सरकारी भूमि और नवाब परिवार की निजी संपत्तियों के विवरण को आधार मानकर ही आगे की कार्रवाई की जाए।
1370 एकड़ भूमि और पांच प्रमुख लोकेशन पर कानूनी पेच
कोहेफिजा, नयापुरा और हलालपुर समेत शहर की कई प्रमुख लोकेशन पर स्थित संपत्तियों को लेकर कानूनी विवाद बना हुआ है। ज्ञापन के अनुसार, सैफ अली खान ने पूर्व में उच्च न्यायालय में दायर एक मामले में भोपाल की लगभग 1370 एकड़ भूमि को नवाब परिवार की निजी संपत्ति बताया था। अब जांच समिति से यह मांग की गई है कि इन जमीनों की वर्तमान स्थिति और उनके कानूनी दर्जे को स्पष्ट किया जाए। रिपोर्ट आने के बाद ही विवादित संपत्तियों की वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा।
पाकिस्तान पलायन से जुड़ा है 'शत्रु संपत्ति' का मामला
इस पूरे विवाद की जड़ नवाब हमीदुल्ला खान की बड़ी बेटी के पाकिस्तान पलायन से जुड़ी हुई है। नियमों के अनुसार, उनके नाम दर्ज संपत्तियां 'शत्रु संपत्ति' (Enemy Property) की श्रेणी में आ सकती हैं। इसी कारण संबंधित जमीनों और जायदाद के स्वामित्व को लेकर जांच की मांग लंबे समय से उठ रही है। इस संवेदनशील मामले को लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय तक भी शिकायतें और मांग पत्र भेजे जा चुके हैं। प्रशासन की आगामी जांच रिपोर्ट इस ऐतिहासिक संपत्ति विवाद का भविष्य तय करेगी।
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