दतिया उपचुनाव में हार के बाद दिल्ली दरबार में बढ़ी मध्य प्रदेश के बीजेपी नेताओं की हलचल, जानें क्या हैं मायने
दतिया विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी की हार के बाद मध्य प्रदेश के कई कद्दावर नेताओं की दिल्ली दौड़ शुरू हो गई है। नेताओं की इन मुलाकातों से सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजनीति में टाइमिंग और इत्तेफाक के बड़े मायने होते हैं। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव में बीजेपी को मिली हार के ठीक बाद से ही दिल्ली का सियासी पारा चढ़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने वाले मध्य प्रदेश के कद्दावर बीजेपी नेताओं का तांता लग गया है। इस सिलसिले की शुरुआत केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से हुई थी, जिन्होंने चुनाव परिणाम के तुरंत बाद पीएम मोदी से भेंट की थी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और अब बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल द्वारा राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने के बाद सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।
🙏 दतिया का दर्द लेकर महाकाल पहुंचे नरोत्तम मिश्रा, दिल्ली यात्रा पर साधी चुप्पी
दतिया उपचुनाव में हार के बाद पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर पहुंचकर भगवान का आशीर्वाद लिया। हालांकि, वे इससे पहले दिल्ली भी गए थे, लेकिन केंद्रीय नेताओं के साथ उनकी मुलाकातों की कोई आधिकारिक तस्वीर या बयान सामने नहीं आया। जब मीडिया ने उनसे इस बारे में सवाल किया, तो उन्होंने अपनी दिल्ली यात्रा के प्रयोजन पर खुलकर कुछ नहीं कहा। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा थी कि वे अपनी रिपोर्ट और सफाई देने दिल्ली गए थे, लेकिन हाईकमान से मिलने वाले नेताओं के आधिकारिक लॉट में उनका नाम न होना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। उधर, भोपाल में भी असंतुष्ट बताए जा रहे वरिष्ठ नेताओं जैसे प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय की मेल-मु मुलाकातों ने राज्य की राजनीति में गर्मी बढ़ा दी है।
🔍 राजनीतिक विश्लेषक बोले- 'भाजपा में जो दिखता है, वो होता नहीं', कांग्रेस ने साधा निशाना
तमाम नेताओं के अचानक दिल्ली दौरे और बैठकों को लेकर राजनीतिक विश्लेषक ऋषि पांडे का कहना है कि बीजेपी की आंतरिक राजनीति की अपनी एक अलग कार्यशैली है, जहाँ जो दिखाई देता है, जरूरी नहीं कि वही सच हो। उन्होंने कहा कि इन मुलाकातों को सीधे तौर पर किसी बड़े भूचाल से नहीं जोड़ा जा सकता, क्योंकि पार्टी में कई बार चीजें केवल सूचनात्मक होती हैं और फैसले हाईकमान अपने समय पर लेता है। दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने चुटकी ली है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरोलिया ने तंज कसते हुए कहा कि पार्टी के भीतर अंतर्कलह और फूट साफ तौर पर नजर आ रही है, जिसका जवाब जनता आने वाले समय में देगी।
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