मंत्री राधा सिंह के कार्यक्रम में बिगड़ी 12 स्कूली छात्रों की तबीयत, पानी और खाने के लिए तरसे बच्चे
सिंगरौली जिले में तिरंगा यात्रा के दौरान उमस और गर्मी के कारण 12 स्कूली छात्रों की तबीयत बिगड़ गई। कार्यक्रम में पानी और नाश्ते की व्यवस्था न होने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं।
मध्य प्रदेश के कृषि एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री राधा सिंह के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चित्रांगी में तिरंगा यात्रा के दौरान एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। इस कार्यक्रम में आठ अलग-अलग स्कूलों के 250 से अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया था, जिनमें से भीषण उमस और गर्मी के चलते 12 बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को पीने के पानी और नाश्ते के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों को मंत्री के आने का इंतजार करते हुए लंबे समय तक गर्मी में खड़ा रहना पड़ा, जिससे कई बच्चे अस्वस्थ हो गए।
💧 पानी और भोजन की कमी से चकराए सिर, ऑटो-रिक्शा से अस्पताल ले जाए गए बच्चे
तिरंगा यात्रा शुरू होने से पहले ही कई छात्रों ने चक्कर आने, कमजोरी और घबराहट की शिकायत शुरू कर दी, जबकि कुछ छात्राएं गर्मी के कारण बेहोश होकर नीचे गिर पड़ीं। एक छात्रा ने सांस लेने में गंभीर कठिनाई की भी शिकायत की। स्थिति बिगड़ती देख मौके पर मौजूद शिक्षकों ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए बीमार पड़े 12 छात्रों को ऑटो-रिक्शा के जरिए चित्रांगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। खंड चिकित्सा अधिकारी हरिशंकर बैस ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि सभी बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद एक घंटे के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, हालांकि एक छात्र को पहले से स्वास्थ्य समस्या होने के कारण ऑक्सीजन सपोर्ट देना पड़ा।
🗣️ कांग्रेस ने प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए तीखे सवाल, बच्चों की सुरक्षा को बताया प्राथमिकता
इस पूरी घटना के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण चौहान ने प्रशासन और आयोजन की व्यवस्थाओं पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य ये मासूम बच्चे हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी हैं और उन्हें किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक गतिविधि में इस तरह धूप व उमस में परेशान किया जाना बेहद निंदनीय है। देशभक्ति की भावना जगाने वाले ऐसे आयोजनों में बच्चों के लिए पर्याप्त पेयजल, छाया और चिकित्सकीय इंतजाम पहले से पुख्ता होने चाहिए थे। इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।
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