अनसूटेबल से सूटेबल कॉलेज में ट्रांसफर हुए नर्सिंग छात्रों को राहत, आगामी परीक्षा में शामिल करने के निर्देश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच में अनसूटेबल से सूटेबल कॉलेज में ट्रांसफर हुए नर्सिंग छात्रों को आगामी परीक्षाओं में शामिल करने और रिजल्ट जारी करने के निर्देश दिए हैं।

Aug 14, 2026 - 13:16
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अनसूटेबल से सूटेबल कॉलेज में ट्रांसफर हुए नर्सिंग छात्रों को राहत, आगामी परीक्षा में शामिल करने के निर्देश

मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसलिंग और फर्जी नर्सिंग कॉलेज मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक बार फिर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सीबीआई जांच में अनसूटेबल पाए गए नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को सूटेबल कॉलेजों में स्थानांतरित करने के संबंध में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट पर विचार करते हुए, हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने सूटेबल कॉलेजों में स्थानांतरित किए जा चुके सभी नर्सिंग छात्रों को आगामी परीक्षाओं में शामिल किए जाने के साथ-साथ उनके रुके हुए परीक्षा परिणाम तत्काल जारी करने के निर्देश दिए हैं।

🔍 695 नर्सिंग कॉलेजों की सीबीआई जांच और छात्रों के स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया

यह पूरा मामला लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और अधिवक्ता विशाल बघेल द्वारा दायर की गई जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें प्रदेश भर के नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया में बरती गई अनियमितताओं को चुनौती दी गई थी। कोर्ट के आदेश पर हुई सीबीआई जांच में प्रदेश के कुल 695 नर्सिंग कॉलेजों में से शुरुआती दौर में मात्र 156 कॉलेज ही 'सूटेबल' (उपयुक्त) पाए गए थे। इसके बाद हाईकोर्ट ने अनसूटेबल कॉलेजों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उनके छात्रों को सूटेबल कॉलेजों में शिफ्ट करने के आदेश दिए थे। बाद में कमियां दूर करने पर 89 और कॉलेज भी सूटेबल की श्रेणी में आ गए थे। मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसलिंग की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कुल 4,475 पात्र छात्रों में से 2,395 छात्रों को सफलतापूर्वक सूटेबल कॉलेजों में स्थानांतरित किया जा चुका है।

🏛️ ग्वालियर-चंबल संभाग के कॉलेजों को नहीं मिली राहत, अगली सुनवाई 21 अगस्त को

सुनवाई के दौरान ग्वालियर-चंबल संभाग के कुछ नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों ने भी आवेदन पेश कर राहत की मांग की थी, उनका तर्क था कि 2021 में गठित समिति द्वारा उन्हें उपयुक्त पाया गया था और सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सीबीआई जांच पर रोक लगाई थी। हालांकि, याचिकाकर्ता और शासन की ओर से यह तथ्य रखा गया कि उन कॉलेजों में फैकल्टी डुप्लीकेसी (फर्जी फैकल्टी) की सही से जांच नहीं हुई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने उन कॉलेजों को बिना सीबीआई जांच के किसी भी प्रकार की राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब आगामी 21 अगस्त को निर्धारित की गई है।

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