जेरेड कुशनर की हमास प्रमुख के साथ गुप्त बैठक, गाजा सीजफायर और रोडमैप पर बड़ी कूटनीतिक पहल
गाजा में संघर्ष-विराम और 15-सूत्रीय रोडमैप को आगे बढ़ाने के लिए जेरेड कुशनर ने हमास प्रमुख से मुलाकात की है। अब नेतन्याहू से होने वाली बैठक पर टिकी हैं निगाहें।
अमेरिका के नवनिर्वाचित नेतृत्व और कूटनीतिक प्रयासों के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने रविवार को हमास प्रमुख खलील अल-हय्या के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक की। यह गुप्त बैठक गाजा में लंबे समय से रुके हुए संघर्ष-विराम (सीजफायर) को फिर से पटरी पर लाने और एक नया कूटनीतिक रास्ता तलाशने का हिस्सा थी। इसके बाद कुशनर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करने वाले हैं। नेतन्याहू पर अमेरिका समर्थित गाजा के 15-सूत्रीय रोडमैप को खारिज करने के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस पूरी बातचीत का मुख्य उद्देश्य उस योजना को बचाना है, जिसके तहत हमास को हथियार छोड़ने हैं और इजराइली सेना को फिलिस्तीनी क्षेत्र से पीछे हटना है।
🌍 अरब देशों का कड़ा रुख और नेतन्याहू पर शांति प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जॉर्डन, पाकिस्तान और मिस्र सहित कई प्रमुख क्षेत्रीय ताकतों ने एक संयुक्त बयान जारी कर इजराइल द्वारा शांति ‘रोड मैप’ को ठुकराने की कड़ी निंदा की है। इन देशों का कहना है कि अब गाजा में शांति स्थापित करने के प्रयासों में रुकावट डालने की पूरी जिम्मेदारी इजराइल की है। दूसरी ओर, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कड़ा रुख है कि जब तक हमास के हथियार पूरी तरह से नष्ट या जब्त नहीं कर लिए जाते, तब तक इजराइली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी। आगामी 27 अक्टूबर को होने वाले राजनीतिक संघर्ष और आंतरिक चुनावों के मद्देनजर नेतन्याहू के लिए यह फैसला लेना बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
🗺️ 15-सूत्रीय रोडमैप और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की चुनौतियाँ
इस प्रस्तावित 15-सूत्रीय योजना के तहत हमास को अपने हथियार उस फिलिस्तीनी टेक्नोक्रैटिक कमेटी को सौंपने हैं जो गाजा के रोजमर्रा के प्रशासन की देखरेख करेगी। हालांकि, हमास ने अपने भारी हथियार सौंपने की शर्त को एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के गठन से जोड़ दिया है, जिसे इजराइल की मौजूदा सरकार मानने से पूरी तरह इनकार करती है। वर्तमान में इजराइली सेना गाजा के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण बनाए हुए है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जेरेड कुशनर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के निदेशक निकोलाई म्लादेनोव की नेतन्याहू के साथ होने वाली बैठकों से इस गतिरोध का क्या समाधान निकलता है।
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