MP पंचायत सचिव ट्रांसफर नीति: अब गृह ग्राम और ससुराल में नहीं मिलेगी पोस्टिंग, सरकार ने जारी किए सख्त नियम
मध्य प्रदेश में पंचायत सचिवों के ट्रांसफर के लिए नई गाइडलाइन। गृह ग्राम, ससुराल और सरपंच के रिश्तेदारों की पोस्टिंग पर लगी रोक। जानें क्या हैं नए नियम।
छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश में तबादला नीति के तहत पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने ग्राम पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार का यह कदम पंचायतों में कामकाज की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। नई नीति के तहत सचिवों के ट्रांसफर अब जिला स्तर पर कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद जिला पंचायत सीईओ द्वारा किए जाएंगे।
गृह ग्राम और ससुराल में पोस्टिंग पर पूर्ण प्रतिबंध
नई गाइडलाइन के अनुसार, अब किसी भी सचिव को उनके गृह ग्राम (पैतृक गांव) या ससुराल में पदस्थ नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, जिन पंचायतों में सचिव का कोई रिश्तेदार सरपंच या उप-सरपंच के रूप में निर्वाचित है, वहां से सचिव को हटाकर अन्यत्र नियुक्त किया जाएगा। इतना ही नहीं, यदि कोई सचिव एक ही पंचायत में 10 वर्षों या उससे अधिक समय से पदस्थ है, तो उनका स्थानांतरण भी अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
'निष्पक्षता और भ्रष्टाचार पर लगाम' प्रशासन का लक्ष्य
पूर्व पंचायत इंस्पेक्टर रेखनलाल राय ने बताया कि पंचायत स्तर पर कामकाज के दौरान कई बार सचिव की निष्पक्षता पर सवाल उठते थे, विशेषकर यदि वे स्थानीय निवासी हों या उनके परिवार का कोई सदस्य जनप्रतिनिधि हो। प्रशासन का मानना है कि इन नियमों से कार्य प्रभावित नहीं होंगे और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में धांधली की आशंका कम होगी।
ठेकेदारी और सामान सप्लाई पर भी सख्ती
भ्रष्टाचार रोकने के लिए विभाग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सचिव या सरपंच अपने पद का लाभ उठाकर अपने परिवार के सदस्यों के माध्यम से पंचायत को सामान की आपूर्ति नहीं कर सकते और न ही वे पंचायत के ठेके ले सकते हैं। यह पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है।
पंचायत सचिव की प्रशासनिक भूमिका
ग्राम पंचायत सचिव सरकार द्वारा नियुक्त प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी होता है। मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, पेंशन, राशन वितरण और सरकारी बजट का लेखा-जोखा रखने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां इन्हीं के कंधों पर होती हैं। नई तबादला नीति से इन सभी योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में पारदर्शिता आने की उम्मीद है।
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