ईरान के IRGC से सीधे संपर्क के लिए अमेरिका ने बिछाया था कूटनीतिक जाल, जानें पूरी अंदरूनी कहानी
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने की कोशिशों के दौरान ट्रंप प्रशासन ने एक गुप्त बैकचैनल तैयार किया था। कुर्दिश राष्ट्रपति नेचिरवान बरजानी ने निभाई थी अहम भूमिका।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने और किसी स्थायी समझौते तक पहुँचने के प्रयासों के दौरान डोनाल्ड एक गुप्त बैकचैनल तैयार किया था, जिसकी जानकारी पहले सार्वजनिक नहीं हुई थी। मई के मध्य में अमेरिकी वार्ताकारों को यह संदेह होने लगा था कि ईरान की तरफ से बातचीत करने वाले अधिकारियों के पास इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के फैसलों पर पूरा नियंत्रण नहीं है। इस स्थिति से निपटने के लिए अमेरिका ने सीधे IRGC के शीर्ष नेतृत्व तक पहुँचने का फैसला किया। इस संवेदनशील और गुप्त संपर्क के लिए ट्रंप प्रशासन ने इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति नेचिरवान बरजानी को चुना, क्योंकि उनके पास अमेरिका और ईरान दोनों का भरोसा होने के साथ-साथ तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों से पुराने निजी संबंध भी थे।
📞 तुलसी गैबर्ड और नेचिरवान बरजानी के बीच फोन पर हुई थी उच्चस्तरीय चर्चा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मई की शुरुआत में तत्कालीन अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गैबर्ड ने नेचिरवान बरजानी से फोन पर संपर्क किया था। बताया जाता है कि यह महत्वपूर्ण कदम अमेरिकी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अनुमति से उठाया गया था। गैबर्ड ने बरजानी से स्पष्ट रूप से जानना चाहा कि क्या ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची जिस समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, उस पर IRGC की भी सहमति है या उनकी कोई अन्य मांग है। इसके बाद बरजानी ने IRGC के संपर्कों के जरिए सीधे जनरल अहमद वाहिदी से बातचीत स्थापित की।
🔒 एन्क्रिप्टेड फोन के जरिए हुई थी बात, सुरक्षा कारणों से टल गई थी आमने-सामने की बैठक
14 मई को IRGC का एक अधिकारी एरबिल में बरजानी के कार्यालय पहुँचा, जहाँ एक सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड फोन के माध्यम से बातचीत कराई गई। बरजानी के पूछने पर जनरल वाहिदी ने पुष्टि की थी कि वे बातचीत का पूरा समर्थन करते हैं और संकट का शांतिपूर्ण हल चाहते हैं। इसके बाद अमेरिका ने एरबिल में अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच गुप्त बैठक कराने का प्रस्ताव रखा, लेकिन सुरक्षा कारणों (विशेषकर इजरायली खुफिया एजेंसियों के मजबूत नेटवर्क के डर से) यह बैठक आगे नहीं बढ़ सकी। वर्तमान में पाकिस्तान और कतर के मध्यस्थ दोनों देशों के बीच संदेश पहुँचा रहे हैं, लेकिन बरजानी की इस कूटनीतिक भूमिका ने भविष्य की संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।
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