AIIMS Bhopal News: मरीजों के परिजनों के लिए बड़ी राहत, 500 बेड का अत्याधुनिक 'विश्राम सदन' बनेगा

AIIMS भोपाल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के परिजनों के लिए 500 बेड का अत्याधुनिक विश्राम सदन बनेगा। जून 2026 के अंत से शुरू होगा निर्माण।

Jun 12, 2026 - 13:26
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AIIMS Bhopal News: मरीजों के परिजनों के लिए बड़ी राहत, 500 बेड का अत्याधुनिक 'विश्राम सदन' बनेगा

भोपाल। एम्स (AIIMS) भोपाल में इलाज कराने आने वाले गंभीर मरीजों के परिजनों और तीमारदारों (अटेंडेंट्स) के लिए एक राहत भरी खबर है। अब उन्हें कड़कड़ाती ठंड, भीषण गर्मी या बारिश में बरामदों और फुटपाथों पर रात नहीं गुजारनी पड़ेगी। एम्स प्रबंधन संस्थान परिसर में मल्टीलेवल पार्किंग के पास 500 बेड की क्षमता वाला एक विशाल और अत्याधुनिक विश्राम सदन बनाने जा रहा है।

 जून के अंत में शुरू होगा निर्माण

इस संवेदनशील परियोजना का निर्माण कार्य जून 2026 के अंतिम सप्ताह से शुरू किया जाएगा। प्रबंधन ने इसे आगामी एक वर्ष (2027) के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह प्रोजेक्ट 'सेवाद्वार आरोग्य फाउंडेशन' के सहयोग और वित्तीय भागीदारी से सामाजिक सरोकार के तहत विकसित किया जा रहा है।

 क्या होंगी विश्राम सदन की खास सुविधाएं?

एम्स में रोजाना पहुंचने वाले हजारों मरीजों के परिजनों को ध्यान में रखते हुए इसे अत्याधुनिक रूप दिया जा रहा है:

  • कमरों के विकल्प: यहाँ सामूहिक डॉरमेट्री के अलावा व्यक्तिगत जरूरत के लिए 1, 2 और 4 बेड वाले कमरे उपलब्ध होंगे।

  • बुनियादी सुविधाएं: सभी कमरे सुरक्षित, हवादार और लॉकर, स्वच्छ पेयजल तथा शौचालय जैसी सुविधाओं से युक्त होंगे।

  • रियायती दरें: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को ध्यान में रखते हुए ठहरने का शुल्क अत्यंत मामूली और रियायती रखा जाएगा।

 डॉक्टर की अनुशंसा पर मिलेगी एंट्री

प्रबंधन ने व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए स्पष्ट किया है कि सदन में उन्हीं परिजनों को प्रवेश मिलेगा, जिनके पास मरीज का इलाज कर रहे डॉक्टर की विशेष अनुशंसा होगी। इससे उन जरूरतमंदों को प्राथमिकता मिलेगी जिनके मरीज लंबे समय से अस्पताल में भर्ती हैं।

 हमीदिया अस्पताल में भी कवायद

एम्स की तर्ज पर ही भोपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, 'हमीदिया अस्पताल' में भी ऐसा ही विश्राम सदन बनाने का प्रस्ताव शासन स्तर पर तैयार किया जा रहा है। फिलहाल वहां जमीन चयन की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। चिकित्सा क्षेत्र में यह पहल परिजनों के तनाव को कम करने और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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