मध्य प्रदेश के जंगलों में होगी पुरातत्व धरोहरों और प्राचीन देवलोकों की खोज, कार्ययोजना तैयार

मध्य प्रदेश के वन क्षेत्रों और राष्ट्रीय उद्यानों में पुरातत्व धरोहरों और प्राचीन देवलोकों की खोज की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर वन विभाग बना रहा है कार्ययोजना।

Aug 17, 2026 - 19:20
0
मध्य प्रदेश के जंगलों में होगी पुरातत्व धरोहरों और प्राचीन देवलोकों की खोज, कार्ययोजना तैयार

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के वन क्षेत्रों में छिपी ऐतिहासिक और प्राचीन विरासतों को सामने लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विशेष निर्देशों के बाद, अब वन विभाग पुरातत्व विशेषज्ञों (ASI) के साथ मिलकर प्रदेश के सभी राष्ट्रीय उद्यानों, टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्यों में पुरातत्व धरोहरों की खोज कराएगा। शासन से औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद इस महत्वाकांक्षी कार्ययोजना पर तेजी से काम शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश राज्य वन्य प्राणी बोर्ड में विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान करने के लिए केंद्र और राज्य के पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।

🌿 पिछले साल खोजे गए थे 1149 प्राचीन देवलोक, अब शेष 21 वनमंडलों में होगी तलाश

गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी राज्य सरकार और पुरातत्व विशेषज्ञों द्वारा एक विशेष अभियान चलाया गया था, जिसके तहत बांधवगढ़ के घने जंगलों, रायसेन के जामगढ़ और सीहोर के देवबड़ला जैसे वन अंचलों में कई प्राचीन मंदिर, गुफाएं, पदचिह्न और अवशेष खोजे गए थे। वन विभाग ने पिछले वर्ष प्रदेश के 63 में से 41 वनमंडलों के भीतर और आसपास कुल 1149 प्राचीन 'देवलोक' (जिन्हें सरना, पवित्र निकुंज, बाबा देव स्थान आदि भी कहा जाता है) खोजकर उनकी सूची मुख्यमंत्री को सौंपी थी। अब सरकार की मंशा के अनुरूप प्रदेश के शेष 21 वनमंडलों में भी इसी प्रकार के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के स्थलों की खोज की जाएगी।

📍 जबलपुर, सतना, छतरपुर और छिंदवाड़ा समेत कई जिलों में मिले हैं महत्वपूर्ण स्थल

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 41 वनमंडलों के भीतर लगभग 979 और वनों के समीप 170 देवलोक स्थित हैं। इनमें जबलपुर में 34, सतना में 7, सीधी में 2, छतरपुर में 50 और छिंदवाड़ा के तीन वनमंडलों में 49 देवलोक शामिल हैं। इसके अलावा इंदौर, बालाघाट, धार और सेंधवा वनमंडलों में विभिन्न पीर दरगाह, मजार और धार्मिक स्थल भी खोजे गए हैं, जहाँ उर्स और मेलों का आयोजन होता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव का उद्देश्य इन सभी ऐतिहासिक और जनजातीय आस्था से जुड़े स्थलों को आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के साथ विकसित करना है, ताकि राज्य की सांस्कृतिक धरोहर का दायरा और अधिक व्यापक हो सके।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User