मध्य प्रदेश में फर्जी डेंटिस्ट पर लगाम, अब 'नो योर डेंटिस्ट' क्यूआर कोड से होगी असली डॉक्टर की पहचान

मध्य प्रदेश स्टेट डेंटल काउंसिल ने फर्जी डेंटिस्टों से बचाने के लिए 'नो योर डेंटिस्ट' क्यूआर कोड और 10 लाख रुपये तक के बीमा की नई योजना शुरू की है।

Aug 18, 2026 - 15:47
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मध्य प्रदेश में फर्जी डेंटिस्ट पर लगाम, अब 'नो योर डेंटिस्ट' क्यूआर कोड से होगी असली डॉक्टर की पहचान

मध्य प्रदेश में दांतों के इलाज को लेकर मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और झोलाछाप व फर्जी डेंटिस्टों पर शिकंजा कसने की दिशा में स्टेट डेंटल काउंसिल ने एक ऐतिहासिक पहल की है। मरीजों के लिए सबसे अहम पहल 'नो योर डेंटिस्ट क्यूआर कोड' होगी, जिसे हर डेंटल क्लीनिक में लगाया जाएगा। इसके तहत मरीज क्लिनिक में लगे क्यूआर कोड को स्कैन करके संबंधित डॉक्टर का नाम, उनकी फोटो और वैध पंजीयन की पूरी जानकारी आसानी से देख सकेंगे। इसके साथ ही काउंसिल ने प्रदेश के डेंटल सर्जनों के लिए तीन बड़ी कल्याणकारी और सुरक्षात्मक योजनाएं शुरू करने की घोषणा की है, जिसके तहत डेंटिस्टों को 10 लाख रुपये तक का प्रोफेशनल सुरक्षा कवच मिलेगा।

🛡️ डेंटिस्टों के लिए शुरू की गई 'सुश्रुत सुरक्षा योजना' और 'कर्मयोगी जीवन सुरक्षा योजना'

मध्य प्रदेश स्टेट डेंटल काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. चंद्रेश शुक्ला ने बताया कि काउंसिल अपने सभी पंजीकृत डेंटल सर्जनों के लिए तीन प्रमुख योजनाएं लेकर आई है। पहली 'सुश्रुत सुरक्षा योजना' है, जिसके तहत डेंटल सर्जनों को 10 लाख रुपये का प्रोफेशनल इंडेम्निटी बीमा प्रदान किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य इलाज के दौरान किसी अप्रिय स्थिति या मरीज को नुकसान होने पर डेंटिस्ट को हर्जाना देने के लिए आर्थिक सुरक्षा देना है। दूसरी 'कर्मयोगी जीवन सुरक्षा योजना' के अंतर्गत डेंटिस्टों को 3 लाख रुपये का दुर्घटना और दिव्यांगता कवर दिया जाएगा, जिसका लाभ 75 वर्ष की आयु तक के डेंटल सर्जनों को मिल सकेगा। तीसरी पहल के रूप में प्रत्येक क्लीनिक के लिए 'नो योर डेंटिस्ट' क्यूआर कोड अनिवार्य किया गया है।

💰 बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के मिलेगा लाभ, आयुष्मान भारत से जोड़ने की भी तैयारी

डॉ. शुक्ला ने स्पष्ट किया कि इन सुविधाओं के लिए डेंटिस्टों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं डाला जाएगा। वर्तमान में काउंसिल में पंजीयन के लिए लिए जाने वाले 600 रुपये के वार्षिक शुल्क में से ही 100 रुपये बीमा के लिए निर्धारित किए गए हैं। देश में अपनी तरह के इस पहले नवाचार का उद्देश्य पेशेवर जोखिम को कम करना और चिकित्सा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है। इसके अलावा, काउंसिल डेंटल सर्जनों को 'आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन' से जोड़ने की तैयारी भी कर रही है, ताकि भविष्य में दंत चिकित्सा से जुड़ी छोटी सर्जरी और अन्य उपचारों को भी इस योजना के दायरे में लाया जा सके।

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