छिंदवाड़ा में आदिवासी हॉस्टल की दीवार फांदकर भागे 11 बच्चे, खूंखार जानवरों के बीच से गुजरे मासूम
छिंदवाड़ा में आदिवासी हॉस्टल के 11 बच्चे बाउंड्री वॉल फांदकर जंगल और नदी पार कर भाग गए। बच्चों ने खराब खाने और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं।
छिंदवाड़ा जिले से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ बुधवार सुबह करीब 5:00 बजे आदिवासी हॉस्टल में रहने वाले 11 बच्चे बाउंड्री वॉल फांदकर भाग गए। ये बच्चे पेंच नेशनल पार्क के घने बफर जोन और एक उफनती हुई नदी को पार कर लगभग 5 किलोमीटर का खतरनाक सफर तय करके एक दूसरे गांव जा पहुंचे। जब बच्चों को ग्रामीणों ने पकड़ा और वापस लाया गया, तो उन्होंने हॉस्टल के अंदर की व्यवस्थाओं और खाने की गुणवत्ता को लेकर सनसनीखेज खुलासे किए।
🌳 खूंखार जानवरों और करंट के तारों के बीच से गुजरे मासूम, पैरेंट्स ने जताई गहरी नाराजगी
हरदुआ माल गांव में स्थित शासकीय आदिवासी बालक आश्रम में रहकर पढ़ाई करने वाले इन बच्चों ने बताया कि वे हॉस्टल के खराब खाने और प्रताड़ना से तंग आ चुके थे। हॉस्टल की अधीक्षिका गायत्री देवी सनोडिया पर मारपीट और खाने में दाल के नाम पर केवल पानी परोसने का गंभीर आरोप लगाया गया है। बच्चों के परिजनों का कहना है कि अगर जंगल में किसी जंगली जानवर या खेतों में लगे करंट के तारों की वजह से बच्चों को कुछ हो जाता, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती? माता-पिता ने प्रशासनिक अधिकारियों से हॉस्टल की व्यवस्थाओं में तुरंत सुधार करने की मांग की है।
📋 अधीक्षिका ने आरोपों को बताया बेबुनियाद, प्रशासन ने जारी किया नोटिस
दूसरी ओर, हॉस्टल की अधीक्षिका गायत्री देवी सनोडिया ने बच्चों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और झूठा करार दिया है। उनका कहना है कि बच्चों ने इसके पहले कभी ऐसी कोई शिकायत नहीं की थी। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त सत्येंद्र सिंह मरकाम ने संज्ञान लिया है और हॉस्टल अधीक्षिका को आधिकारिक रूप से कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कर रहा है ताकि हॉस्टल की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लाई जा सके।
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