फोरलेन हाईवे पार करने और आवारा जानवरों के डर के बीच सांदीपनि स्कूलों तक पहुंच रहे बच्चे
शिवपुरी, छतरपुर और मुरैना में सरकारी स्कूलों को सांदीपनि स्कूलों में मर्ज कर दिया गया है। बस सुविधा न होने के कारण छोटे बच्चों और अभिभावकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के नाम पर एक बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत तीन किलोमीटर के दायरे में आने वाले आठ सरकारी स्कूलों को 'सांदीपनि विद्यालयों' में मर्ज कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के बाद अब इन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 500 से ज्यादा बच्चे सांदीपनि स्कूलों में पढ़ाई करेंगे। हालांकि सरकार का यह कदम बेहतर शिक्षा के लिए उठाया गया है, लेकिन उन छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों के लिए यह मुसीबत बन गया है जिनके घर स्कूल से तीन किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर स्थित हैं। कई बच्चे दिव्यांग भी हैं, जिन्हें बिना किसी बस सुविधा के रोजाना स्कूल आने-जाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
👦 दिव्यांग बच्चों और बिना वाहन वाले परिवारों की बढ़ी मुश्किलें
इस मर्जर के कारण कई परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक और व्यावहारिक संकट खड़ा हो गया है। ठकुरपुरा स्कूल में पढ़ने वाला दिव्यांग छात्र समीर शाक्य भी अब सांदीपनि स्कूल में पढ़ेगा, लेकिन उसकी दिव्यांगता और पिता के ड्राइवर होने के कारण घर पर समय की कमी ने परिवार की चिंता बढ़ा दी है। इसी तरह ठकुरपुरा से 102, बछौरा से 28, मंशापूर्ण से 84 और नोहरी कला से करीब 12 बच्चों को सांदीपनि स्कूल में भेजा गया है। कई परिवार ऐसे हैं जिनके पास साइकिल या अन्य कोई वाहन तक नहीं है और वे मजदूरी कर अपना जीवन चलाते हैं। बस सेवा शुरू न होने के कारण अब अभिभावक अपने बच्चों के लिए पास के अन्य विकल्पों की तलाश करने को मजबूर हैं।
⚠️ छतरपुर में फोरलेन पार करने की मजबूरी और मुरैना में आवारा जानवरों का खतरा
यह समस्या सिर्फ शिवपुरी तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी सांदीपनि स्कूलों में मर्जर को लेकर ऐसी ही परेशानियां सामने आ रही हैं। छतरपुर में डेरा पहाड़ी मिडिल स्कूल के 450 बच्चों को 3.5 किलोमीटर दूर सांदीपनि स्कूल भेजा गया है, जहाँ बच्चों को कच्ची सड़क के बाद व्यस्त फोरलेन हाईवे पार करना पड़ता है। वहीं मुरैना के रोरियापुरा गांव में प्राइमरी स्कूल राजौधा को सांदीपनि स्कूल से 5 किलोमीटर दूर मर्ज किए जाने की तैयारी है, जिसके रास्ते में आवारा जानवरों के हमले और दुर्घटना का बड़ा डर बना हुआ है। ग्रामीणों ने इस संबंध में कलेक्टर और डीईओ को अपनी कड़ी आपत्ति भी दर्ज कराई है।
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