कनकण में शंकर का संदेश, धातु के कतरनों और मशीनों के पुर्जों से तैयार हुई महादेव की अद्भुत मूर्ति
सिवनी के कलाकारों ने स्क्रैप पार्ट्स और मशीनों के कबाड़ से भगवान शिव की 5 क्विंटल वजनी भव्य प्रतिमा बनाई है। इसे नगर के ऐतिहासिक मठ मंदिर में स्थापित किया गया है।
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से कला और आस्था का एक बेहद अनूठा और प्रेरणादायी उदाहरण सामने आया है। यहाँ के प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए अष्टधातु के स्क्रैप पार्ट्स, खराब मशीनों के पुर्जों और कबाड़ की सामग्रियों से भगवान शिव की एक अत्यंत विशाल, भव्य और मनमोहक प्रतिमा तैयार की है। लगभग 5 क्विंटल वजनी इस आकर्षक और कलात्मक प्रतिमा को पूरी तरह आकार देने में करीब 12 से 15 कलाकारों की संयुक्त टीम को लगभग तीन महीने का लंबा और कठिन समय लगा है।
⚙️ लोहे, स्टील, तांबे और पीतल के कतरनों से दिया गया भगवान शिव को स्वरूप
इस अद्भुत प्रतिमा के निर्माण के बारे में जानकारी देते हुए स्थानीय कलाकार विक्की कश्यप ने बताया कि सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव के अलग-अलग रूपों को दर्शाने का प्रयास किया जाता है। इस बार इस प्रतिमा को बनाने के लिए लोहे, स्टील, चांदी, पीतल, तांबा और जस्ते जैसे विभिन्न धातुओं के खराब हो चुके कलपुर्जों का भरपूर उपयोग किया गया है। इसमें सबसे ज्यादा मात्रा में लोहा और स्टील की कतरनों का इस्तेमाल किया गया है। प्रतिमा के माथे पर सोने और चांदी का तिलक सजाया गया है, हाथों के स्वरूप में जस्ता और रांगा का प्रयोग हुआ है, जबकि महादेव की जटाओं में तांबे और पीतल के लोटे व अन्य पुराने पात्रों को बेहद खूबी के साथ जोड़ा गया है।
🏛️ ऐतिहासिक मठ मंदिर परिसर में हुई स्थापना, स्क्रैप आर्ट और सनातनी परंपरा का संगम
कलाकारों की इस टीम ने अपनी अटूट मेहनत से कबाड़ की इन बेजान वस्तुओं को जोड़कर यह साबित कर दिया है कि कला और भावना से किसी भी बेकार चीज को अद्भुत रूप दिया जा सकता है। इस अनूठी शिव प्रतिमा को नगर के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मठ मंदिर परिसर में स्थापित किया गया है, जहाँ इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुँच रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों ने भी लोहा और स्टील के टुकड़े देकर इस रचनात्मक कार्य में पूरा सहयोग किया। सनातनी परंपरा और आधुनिक स्क्रैप आर्ट के इस खूबसूरत संगम को लोग काफी सराह रहे हैं।
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