मानसून में भी खुला रहता है बांधवगढ़ का बफर जोन, पर्यटकों के लिए बाघ देखने की रहती है पूरी गारंटी
मानसून सीजन में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का कोर जोन भले बंद हो, लेकिन बफर जोन में सफारी जारी रहती है। यहां बारिश के दौरान बाघों के दीदार आसानी से हो जाते हैं।
विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अपनी अनूठी खूबियों के कारण देश-दुनिया में पर्यटकों के बीच हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है। यहाँ बाघों के आसानी से दीदार होने की वजह से इसे टाइगर लवर्स का पसंदीदा ठिकाना माना जाता है। खास बात यह है कि मानसून सीजन के दौरान जब देश के अधिकांश टाइगर रिजर्व के कोर जोन पर्यटकों के लिए बंद कर दिए जाते हैं, तब भी बांधवगढ़ में बाघों के दीदार आसानी से हो जाते हैं। इस टाइगर रिजर्व की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ साल के 12 महीने बाघ दिखने की गारंटी रहती है, और बारिश के मौसम में यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता इस अनुभव को और भी ज्यादा रोमांचक और यादगार बना देती है।
🌧️ बरसात में खास हो जाता है बांधवगढ़, बफर जोन में लगातार हो रही बाघों की साइटिंग
नियमों के तहत मानसून सीजन की शुरुआत के साथ ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का कोर जोन 1 जुलाई से 30 सितंबर तक के लिए बंद कर दिया जाता है, जिससे पर्यटक कोर एरिया में सफारी नहीं कर सकते। हालांकि, बफर जोन में सफारी का सिलसिला लगातार जारी रहता है। शहडोल से बफर सफारी का आनंद लेने पहुँचे पर्यटक नरेश सिंघल ने बताया कि उन्होंने धमोखर बफर जोन में लगभग 4 साल के एक मेल शावक को खुलेआम मदमस्त अंदाज में घूमते हुए देखा।
पार्क के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय के अनुसार, बारिश के दिनों में बाघों की टेरिटोरियल मार्किंग (गश्त के निशान) धुल जाने के कारण उन्हें अपने क्षेत्र पर दबदबा बनाए रखने के लिए ज्यादा घूमना पड़ता है, यही वजह है कि मानसून में भी बफर जोन में बाघों की एक्टिविटी काफी ज्यादा रहती है और पर्यटकों को बेहतरीन साइटिंग मिलती है। वर्तमान मानसून सीजन के दौरान (1 जुलाई से 16 अगस्त तक) मात्र 47 दिनों में बफर जोन में 400 से ज्यादा सफारी वाहनों का संचालन हुआ, जिसमें लगभग 2000 पर्यटकों ने जंगल सफारी का लुत्फ उठाया।
🌿 हरियाली, झरने और शांत माहौल—प्रकृति को महसूस करने का सबसे बेहतरीन समय
मानसून के दौरान बांधवगढ़ के जंगलों का एक बिल्कुल अलग और अद्भुत रूप देखने को मिलता है। लगातार बारिश के बाद यहाँ के घास के मैदान पूरी तरह हरे-भरे हो जाते हैं, पहाड़ों से गिरते प्राकृतिक झरने, बादलों से घिरे ऊँचे पहाड़ और सुबह के समय उठता कोहरा पर्यटकों का मन मोह लेते हैं। पार्क प्रबंधन का कहना है कि गर्मियों में लोग मुख्य रूप से बाघ देखने जाते हैं, लेकिन मानसून का समय जंगल को गहराई से महसूस करने का होता है।
वर्तमान में पर्यटकों की संख्या कम होने के कारण जंगल शांत रहता है, जिससे पक्षियों की चहचहाहट, रंग-बिरंगी तितलियाँ और मोरों का नृत्य आसानी से देखने को मिलता है। पर्यटकों की सुविधा के लिए धमोखर बफर का परासी जोन, पनपथा बफर का पचपेड़ी जोन और मानपुर बफर का जोहिला जोन खुले हुए हैं, जहाँ सुबह 5:30 से 11:30 और शाम 4:00 से 7:00 बजे तक सफारी का संचालन किया जा रहा है।
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