उमरिया में उफनती नदी पार करने को मजबूर स्कूली बच्चे, कमर तक पानी के बीच से गुजरकर जा रहे हैं स्कूल
उमरिया जिले के करकेली विकासखंड में स्कूली बच्चे उफनती बड़की नदी को पार करके स्कूल जाने को मजबूर हैं। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं।
मध्य प्रदेश में बदहाल व्यवस्थाओं और ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनी हकीकत को बयां करती तस्वीरें आए दिन सामने आती रहती हैं। बारिश के मौसम में आम नागरिकों के साथ-साथ स्कूली बच्चों की मुश्किलें और भी ज्यादा बढ़ जाती हैं। उमरिया जिले के करकेली विकासखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मानिकपुर गांव से एक ऐसी ही डरावनी और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जहाँ छोटे-छोटे स्कूली बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर रोज स्कूल पहुँचने को मजबूर हैं। इन मासूमों का दर्द और संघर्ष बयां करती तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
🚶♂️ कमर तक भरे पानी और तेज बहाव के बीच से गुजर रहे छात्र, 10 किमी की दूरी बचाने की मजबूरी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मानिकपुर गांव के इन बच्चों को बरबसपुर स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल जाना होता है, जिसके रास्ते में 'बड़की नदी' पड़ती है। वर्तमान में लगातार हो रही बारिश के चलते यह नदी पूरी तरह उफान पर है। सामने आए वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि कई स्कूली बच्चे एक-दूसरे का हाथ पकड़कर और एक-दूसरे की मदद लेते हुए कमर तक गहरे पानी और तेज बहाव के बीच से नदी पार कर रहे हैं। ग्रामीण मोहनलाल सिंह ने बताया कि मानिकपुर से नदी पार करने के बाद स्कूल की दूरी बहुत कम पड़ती है, लेकिन यदि नदी पार न की जाए तो बच्चों को घूमकर लगभग 10 किलोमीटर लंबा अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। यही वजह है कि छोटे बच्चे समय और दूरी बचाने के लिए इस खतरनाक रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।
🏫 प्राचार्य को नहीं थी जानकारी, जिला शिक्षा अधिकारी ने दिए जांच और सुधार के आदेश
इस गंभीर मामले के तूल पकड़ने के बाद जब बरबसपुर हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रभारी प्राचार्य अमित पटेल से बात की गई, तो उनका कहना था कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि बच्चे इस प्रकार नदी पार करके स्कूल आ रहे हैं और न ही बच्चों या परिजनों द्वारा स्कूल प्रबंधन को इसकी कोई सूचना दी गई थी। वहीं, इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी बी.एस. बरकड़े ने कहा कि स्कूल के प्राचार्य से पूरी रिपोर्ट तलब की जाएगी और मामले की गहराई से जांच कराई जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया है कि बच्चों के सुरक्षित आवागमन के लिए जल्द ही वैकल्पिक और पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
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