नागरिकों की सूचना पर स्टेट जीएसटी की पहली बड़ी कार्रवाई, विजेता रोडलाइंस पर छापा मारकर ट्रक जब्त
नागरिकों से मिली सूचना के आधार पर इंदौर में स्टेट जीएसटी विभाग ने पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए ट्रांसपोर्टर पर छापा मारा है। बिना टैक्स चुकाए माल ले जा रहे ट्रक जब्त किए गए हैं।
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में नागरिकों से मिली गुप्त सूचना के आधार पर स्टेट जीएसटी (कमर्शियल टैक्स) विभाग ने कर चोरी के खिलाफ अपनी पहली बड़ी और अनूठी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग की टीमों ने मंगलवार को विजेता रोडलाइंस नामक ट्रांसपोर्टर के ठिकानों पर अचानक छापा मारा। ट्रांसपोर्ट नगर से लेकर पालदा तक फैले इस अभियान के तहत जीएसटी के अधिकारी ट्रांसपोर्टर के दफ्तर और गोदामों पर जाँच के लिए पहुँचे। अधिकारियों ने मौके पर कार्रवाई करते हुए करीब पाँच ट्रकों में भरे माल को जाँच के लिए जब्त किया और उसका भौतिक सत्यापन शुरू कर दिया है। प्रारंभिक जाँच में बिना कर चुकाए और टैक्स चोरी कर माल के परिवहन किए जाने के पुख्ता तथ्य हाथ लगे हैं।
💻 नए ऑनलाइन पोर्टल पर मिली थी शिकायत, बिना बिल के गुटखे और मेटल स्क्रैप के परिवहन की थी आशंका
गौरतलब है कि स्टेट जीएसटी विभाग ने हाल ही में अपने आधिकारिक पोर्टल www.mptax.mp.gov.in पर कर चोरी की ऑनलाइन सूचना देने की एक नई सुविधा शुरू की है। इस डिजिटल लिंक के माध्यम से कोई भी जागरूक नागरिक टैक्स चोरी से जुड़ी गोपनीय जानकारी विभाग तक पहुँचा सकता है। पिछले कुछ दिनों में इस पोर्टल के जरिए करीब 100 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनकी शुरुआती जाँच के बाद अधिकारियों को छापेमारी के निर्देश दिए गए। जब अधिकारी ट्रांसपोर्टर के ठिकानों पर पहुँचे तो वहाँ साइन बोर्ड किसी अन्य फर्म के नाम के मिले। शिकायतों के अनुसार, यह ट्रांसपोर्टर बिना बिल के अवैध रूप से माल का परिवहन कर रहा था, हालाँकि विभाग ने अभी आधिकारिक रूप से अन्य विशेष सामग्रियों की पुष्टि नहीं की है।
🔒 नाम गुप्त रखने की सुविधा के साथ पोर्टल पर कर सकते हैं शिकायत, 30 दिनों के भीतर होगी कार्रवाई
वाणिज्यिक कर विभाग के आयुक्त अनय द्विवेदी ने अधिक से अधिक नागरिकों से टैक्स चोरी से जुड़ी तथ्यात्मक सूचनाएँ साझा करने का आह्वान किया है। विभाग की वेबसाइट पर बाईं ओर नीचे की तरफ लाल रंग में ब्लिंक करती हुई 'प्रोवाइड टैक्स इवेजन इंफॉर्मेशन' की लिंक पर क्लिक करके कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। खास बात यह है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। पोर्टल पर दर्ज होने वाली हर शिकायत पर 30 दिनों के भीतर संबंधित अधिकारी को कार्रवाई करके उसकी रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड करनी होती है, जिसकी सीधी मॉनिटरिंग मुख्यालय स्तर से की जाती है।
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