शक्कर महंगी है तो गुड़ खा लो... मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस अजीबोगरीब बयान पर छिड़ी बहस

मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शक्कर की बढ़ती कीमतों पर अजीब बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 40 साल से ऊपर के लोगों को शक्कर नहीं खानी चाहिए, शक्कर महंगी है तो गुड़ खा लें।

Aug 27, 2026 - 10:07
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शक्कर महंगी है तो गुड़ खा लो... मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस अजीबोगरीब बयान पर छिड़ी बहस

मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं, और इस बार उन्होंने देश में शक्कर की बढ़ती कीमतों को लेकर एक बेहद अजीबोगरीब और चौंकाने वाला तर्क दिया है। इंदौर के परदेशीपुरा स्थित आस्था वृद्धाश्रम में रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे मंत्री विजयवर्गीय से जब पत्रकारों ने शक्कर की बढ़ती कीमतों को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश में 90 प्रतिशत लोग मीठा पसंद नहीं करते हैं, और 40 वर्ष की आयु पार कर चुके लोगों को तो बिल्कुल भी शक्कर नहीं खानी चाहिए। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि "मैं तो कहता हूँ शक्कर और महंगी हो जाए, ताकि लोग स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित रहें। अगर शक्कर महंगी है तो गुड़ खा लो।"

🩺 स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है शक्कर, मंत्री ने दिया आयुर्वेद का हवाला

अपने इस अनोखे बयान के पक्ष में तर्क देते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आयुर्वेद का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद भी यही सलाह देता है कि 40 साल से अधिक उम्र के लोगों को शक्कर का सेवन नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, उनके अलावा उनके कई अन्य सहयोगी भी शक्कर की तरफ देखते तक नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले की तुलना में शक्कर के दाम घटे हैं, इसलिए इसे लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। मंत्री की यह बात सुनकर वहां मौजूद लोग एक पल के लिए हैरान रह गए, हालांकि इसके बाद मंत्री और उनके साथ मौजूद पार्टी कार्यकर्ता हंसने लगे।

🏛️ इंदौर का ऐतिहासिक 'शक्कर बाजार': जहाँ आज शक्कर की एक भी दुकान नहीं, केवल बचे हैं होलकर कालीन शिलालेख

एक तरफ जहां बाजार में शक्कर की बढ़ती कीमतों और किल्लत की चर्चा है, वहीं इंदौर में एक ऐसा बाजार भी है जिसका नाम तो 'शक्कर बाजार' है, लेकिन वहां आज शक्कर की एक भी दुकान, व्यापारी या खरीदार मौजूद नहीं है। इंदौर के सर्राफा बाजार से सटे इस ऐतिहासिक इलाके में शक्कर के नाम पर केवल होलकर कालीन वे शिलालेख देखने को मिलते हैं, जिन पर पूरे बाजार की पवित्रता और व्यापारिक नैतिकता बनाए रखने की कड़े निर्देश व नसीहतें लिखी हुई हैं।

📜 क्या है होलकर कालीन शक्कर बाजार का इतिहास? शिलालेख पर दर्ज हैं व्यापारिक नियम

स्थानीय व्यापारी कैलाश लाहोटी के अनुसार, होलकर शासनकाल के दौरान इस विशेष इलाके में शक्कर के थोक व्यापारी ट्रेडिंग का काम किया करते थे, और यहीं पर शक्कर की खुली बोलियां लगती थीं। उस दौर के दस्तावेजों और तस्वीरों में इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर शक्कर के व्यापार का जिक्र मिलता है। वक्त के साथ व्यापार का स्वरूप तो पूरी तरह बदल गया, लेकिन होलकर राजवंश के समय लगाए गए वे शिलालेख आज भी इस बात की गवाही देते हैं कि इस बाजार की स्थापना और इसके नियम किस प्रकार तय किए गए थे।

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