जबलपुर में हर साल होगी 80 टैंकों की ओवरहालिंग, रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बन रहा भारत
जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में 475 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले T-72 टैंक ओवरहाल प्रोजेक्ट का भूमि पूजन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम मोहन यादव ने किया।
जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने T-72 टैंक ओवरहाल परियोजना का भव्य भूमि पूजन किया। यह अत्याधुनिक वर्कशॉप करीब 475 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही है। रक्षा मंत्री ने इसे जबलपुर के लिए एक ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि यह मील का पत्थर साबित होगा और इसके जरिए जबलपुर भारत के रक्षा उत्पादन के नक्शे पर अपनी एक विशेष और मजबूत पहचान बनाएगा। इस गरिमामयी कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
⚙️ हर साल होगी 80 टैंकों की ओवरहालिंग, राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौती होगी दूर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश देश का एक प्रमुख डिफेंस हब बनने की ओर अग्रसर है। जबलपुर में 475 करोड़ रुपये की लागत से T-72 और T-90 टैंकों के ओवरहालिंग के लिए इस वर्कशॉप का निर्माण किया जा रहा है। भारतीय सेना को हर साल कुल 230 टैंकों की ओवरहालिंग की आवश्यकता होती है। देश में अभी तमिलनाडु के अवादी (Avadi) में एक वर्कशॉप है, जहां 150 टैंकों की ओवरहालिंग हो सकती थी, लेकिन 80 टैंकों का गैप हर साल बना रहता था। यह 80 टैंकों का अंतर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती था, जिसे अब जबलपुर में यह नई सुविधा शुरू होने से पूरी तरह दूर कर लिया जाएगा।
🇮🇳 रक्षा मामलों में विदेशी सप्लाई पर निर्भरता घटी, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि युद्ध में वही देश लंबे समय तक टिक सकता है जो इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन, सप्लाई, एडवांस तकनीक और इनोवेशन के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुका हो। भारत आज इसी राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब हम रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी सप्लाई पर अत्यधिक निर्भर नहीं हैं, बल्कि रिपेयर, मेंटेनेंस और इनोवेशन हर क्षेत्र में हमने आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन जहां 46 हजार करोड़ रुपये का था, वह 2026 में बढ़कर 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। साथ ही रक्षा निर्यात 1000 करोड़ से बढ़कर 39 हजार करोड़ हो चुका है, जिसे जल्द ही 50 हजार करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
🦾 T-72 टैंक हैं भारतीय सेना की 'आर्यन वॉल', आधुनिक युद्ध में भी टैंक की प्रासंगिकता बरकरार
T-72 टैंकों को भारतीय सेना की 'आर्यन वॉल' बताते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि आज के आधुनिक युद्धों में भले ही ड्रोन और साइबर अटैक जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा हो, लेकिन इसके बावजूद युद्ध के मैदान में टैंक के महत्व को कभी कम नहीं आंका जा सकता। आधुनिक युद्ध मिसाइल, साइबर तकनीक और एयरोस्पेस का मिला-जुला रूप है, लेकिन सैनिकों का मानना है कि जब तक उनके पास टैंक नहीं होता, वे खुद को मैदानी जंग में पूरी तरह मजबूत महसूस नहीं करते।
💼 जबलपुर के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर और एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा
रक्षा मंत्री ने कहा कि इस बड़ी सुविधा के विकसित हो जाने से जबलपुर के एमएसएमई (MSME) सेक्टर को भी अभूतपूर्व लाभ मिलेगा, क्योंकि टैंकों के मेंटेनेंस में स्थानीय स्तर के उत्पादों और उपकरणों का उपयोग होता है, जिससे आसपास के उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा। भारत का युवा वर्ग अपनी मेहनत और तकनीकी कौशल से पूरी दुनिया में लोहा मनवा चुका है। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से जबलपुर के स्थानीय नौजवानों के लिए रोजगार के बड़े पैमाने पर नए द्वार खुलेंगे। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार हमेशा से उद्योग-विकास की समर्थक रही है और जबलपुर को मिले नए 12 T-72 टैंकों का मेंटेनेंस अब स्थानीय व्हीकल फैक्ट्री में ही किया जाएगा।
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