कुपोषण से निपटने के लिए उज्जैन में 'प्रोजेक्ट संवर्धन' शुरू, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दी जा रही खास ट्रेनिंग
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक उज्जैन में बच्चों में दुबलेपन की दर राज्य के औसत से अधिक है। कुपोषण से निपटने के लिए प्रशासन ने 'प्रोजेक्ट संवर्धन' शुरू किया है।
मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से बच्चों के पोषण स्तर को लेकर मिली-जुली तस्वीर सामने आई है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भले ही जिले में बच्चों के ठिगनेपन (उम्र के हिसाब से कम लंबाई) की समस्या में सुधार हुआ है, लेकिन दुबलेपन (लंबाई के मुकाबले कम वजन) के आंकड़े अभी भी चिंता का विषय बने हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उज्जैन में दुबलेपन की दर 25.4 प्रतिशत है, जो कि पूरे मध्य प्रदेश की औसत दर (23.8 प्रतिशत) से अधिक है। हालांकि, पिछली रिपोर्ट की तुलना में इसमें कुछ सुधार जरूर दर्ज किया गया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे नाकाफी मान रहे हैं क्योंकि दुबलापन बच्चे की मौजूदा तीव्र पोषण स्थिति का सीधा संकेतक होता है।
👩🍼 प्रोजेक्ट संवर्धन की शुरुआत: जमीनी स्तर पर माताओं और नवजात शिशुओं की मॉनिटरिंग के लिए 270 कर्मचारी प्रशिक्षित
कुपोषण की इस समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए उज्जैन प्रशासन ने केवल आंगनबाड़ी में वजन लेने की परंपरा से हटकर 'प्रोजेक्ट संवर्धन' की शुरुआत की है। ग्लोबल व्हील फाउंडेशन के सहयोग से महिला एवं बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग के करीब 270 अधिकारियों व कर्मचारियों (जिनमें एएनएम, आशा कार्यकर्ता और सुपरवाइजर शामिल हैं) को चार दिवसीय विशेष आवासीय प्रशिक्षण दिया गया है। जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कुमठ और जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुनीता परमार के मार्गदर्शन में तैयार इस मॉडल के तहत हर प्रशिक्षित कार्यकर्ता को माताओं और बच्चों के लगभग 10-10 जोड़ों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो घर-घर जाकर स्तनपान के सही तरीके, मां की डाइट में प्रोटीन की मात्रा और बच्चे की रोजमर्रा की ग्रोथ पर बारीक नजर रख रहे हैं।
🍼 स्तनपान की सही तकनीक और प्रोटीन पर जोर: आईआईटी मुंबई के सहयोग से तैयार हुआ एक्शन प्लान
विशेषज्ञों का मानना है कि पोषण की कई समस्याएं गलत तरीके से स्तनपान कराने या बच्चे की सही पोजीशन न होने के कारण पैदा होती हैं। इसे दूर करने के लिए ट्रेनिंग के दौरान कार्यकर्ताओं को डमी मॉडल के जरिए माताओं को सही लैचिंग और पोजीशन सिखाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, आम भोजन से गायब हो रहे प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर मिलने वाले पौष्टिक खाद्य पदार्थों की जानकारी परिवारों को दी जा रही है। इस पूरी मुहिम में आईआईटी मुंबई की भी सहभागिता रही है, जहां चाइल्ड सर्वाइवल और कुपोषण रोकथाम पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। सरकार की यह पहल यदि धरातल पर पूरी ईमानदारी से लागू होती है, तो आने वाले समय में उज्जैन के बच्चों की सेहत में और अधिक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
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