मंडला में गाय के गोबर और प्राकृतिक रंगों से बन रही वैदिक चित्रकारी, स्वसहायता समूह की महिलाओं की अनूठी पहल

मंडला के नैनपुर विकासखंड में स्वसहायता समूह की महिलाएं गाय के गोबर और प्राकृतिक रंगों से वैदिक चित्रकारी और हस्तशिल्प उत्पाद तैयार कर रही हैं।

Aug 29, 2026 - 13:36
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मंडला में गाय के गोबर और प्राकृतिक रंगों से बन रही वैदिक चित्रकारी, स्वसहायता समूह की महिलाओं की अनूठी पहल

क्या आपने कभी सोचा है कि गाय के गोबर से भी खूबसूरत और आकर्षक वैदिक चित्रकारी तैयार की जा सकती है? मध्य प्रदेश के मंडला जिले में स्वसहायता समूह की दीदियों ने इस सोच को सच कर दिखाया है। नैनपुर विकासखंड में महिलाएं गाय के गोबर, मिट्टी और पूरी तरह प्राकृतिक रंगों का उपयोग करके आकर्षक वैदिक कलाकृतियां और हस्तशिल्प उत्पाद बना रही हैं। स्वदेशी और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देने वाली इन वैदिक चित्रकारी की मांग अब केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि भोपाल, दिल्ली और महाराष्ट्र तक पहुँच चुकी है, जो देखने वालों का मन मोह रही है। शासन-प्रशासन के प्रोत्साहन से यह पहल महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का एक मजबूत जरिया बन गई है।

🌿 कैसे तैयार होती है वैदिक चित्रकारी: गोबर के पाउडर और प्रीमिक्स से बनते हैं आकर्षक उत्पाद

इन खास वैदिक कलाकृतियों को बनाने की प्रक्रिया भी काफी दिलचस्प है। सबसे पहले शुद्ध गाय के गोबर को सुखाकर उसका महीन पाउडर तैयार किया जाता है। इसके बाद उस पाउडर में स्थानीय मिट्टी और प्रीमिक्स मिलाकर विभिन्न सांचों में ढाला जाता है और फिर धूप में सुखाया जाता है। सूखने के बाद इसमें प्राकृतिक रंगों और मोतियों जैसी सामग्री से सजावट कर इसे बेहद आकर्षक रूप दिया जाता है। बाजार में मौजूद प्लास्टिक और सिंथेटिक सामग्रियों के विकल्प के रूप में ये इको-फ्रेंडली वैदिक चित्रकारी अपनी एक अलग और अनूठी पहचान बना रही हैं।

🛍️ भोपाल हाट से लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स तक हो रही बिक्री, मिल रही है जबरदस्त सराहना

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत तैयार इन उत्पादों की बिक्री जिला प्रशासन के माध्यम से की जा रही है। जिला प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी भी बढ़-चढ़कर इन स्वदेशी उत्पादों की खरीदी कर रहे हैं। इन वैदिक चित्रकारी को भोपाल के प्रसिद्ध 'भोपाल हाट' में भी प्रदर्शित और विक्रय के लिए भेजा जा रहा है, साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी इन हैंडक्राफ्ट्स की बुकिंग और बिक्री की जा रही है। त्योहारी सीजन की पवित्रता को बनाए रखने वाली यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी संस्कृति को बढ़ावा दे रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है।

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