मूसलाधार बारिश से मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग प्रभावित, कई ट्रेनें रुकीं; 10 घंटे तक फंसे रहे 5 हजार लोग

सतना और चित्रकूट में भारी बारिश से मंदाकिनी नदी में बाढ़ आ गई है। वायुसेना के हेलीकॉप्टर और रेस्क्यू टीमों ने फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है।

Aug 30, 2026 - 10:07
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मूसलाधार बारिश से मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग प्रभावित, कई ट्रेनें रुकीं; 10 घंटे तक फंसे रहे 5 हजार लोग

मध्य प्रदेश के सतना और उत्तर प्रदेश से लगे पवित्र तीर्थ क्षेत्र चित्रकूट में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और पहाड़ी इलाकों से आ रहे पानी ने शनिवार को भारी तबाही मचा दी। हालात इतने बेकाबू हो गए कि सुरक्षा और बचाव कार्य के लिए सेना और वायुसेना को मैदान में उतारना पड़ा। मंदाकिनी, शरभंग, बरदहा और वाल्मीकि नदियों में आई भयंकर बाढ़ के कारण भगवान श्री राम की तपोभूमि पूरी तरह जलमग्न हो गई। इसके अलावा, व्यस्त मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग के सतना-मानिकपुर रेलखंड पर कई किलोमीटर तक पटरियों पर पानी भरने से यातायात पांच घंटे तक पूरी तरह प्रभावित रहा, जिसके चलते 18 यात्री ट्रेनों और 20 मालगाड़ियों को विभिन्न स्टेशनों पर रोकना पड़ा। शाम को स्थिति नियंत्रित होने पर ट्रेनों को बेहद धीमी गति (10 किमी प्रति घंटा) से गुजारा गया।

👥 10 घंटे तक फंसे रहे 5 हजार लोग, रामघाट डूबा और टूटा 23 साल पुराना जलस्तर का रिकॉर्ड

बाढ़ के विकराल रूप के कारण झांसी-मीरजापुर हाईवे और चित्रकूट-सतना मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोकनी पड़ी। प्रसिद्ध रामघाट पूरी तरह डूब चुका है और कई पुल व बांध क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नयागांव हनुमानधारा मार्ग के पुल की रेलिंग तेज बहाव में बह गई, जबकि मानिकपुर-सतना मार्ग पर रपटा डूबने से संपर्क कट गया। मठ-मंदिर, होटल और घरों में पानी भरने से तीर्थ क्षेत्र में करीब 10 घंटे तक 5 हजार लोग फंसे रहे। सतना जिले में महज 24 घंटों के भीतर 123.3 मिमी (लगभग 4.85 इंच) बारिश दर्ज की गई। उफनती मंदाकिनी नदी का जलस्तर 23 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर समुद्र तल से 135.200 मीटर पर पहुंच गया, जो वर्ष 2003 के 134.500 मीटर के उच्च स्तर से भी 15 सेमी अधिक है।

🚁 वायुसेना और प्रशासन का रेस्क्यू ऑपरेशन, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज लेंगे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा

नदी के रामघाट क्षेत्र में पानी खतरे के निशान (126.500 मीटर) से 8.70 मीटर ऊपर बह रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वायुसेना ने मोर्चा संभाला और दो हेलीकॉप्टरों की मदद से 18 लोगों तथा नदी में फंसे दो ट्रक चालकों को सुरक्षित बाहर निकाला। वहीं, चित्रकूट प्रशासन ने स्थानीय नावों और स्टीमर की सहायता से छतों पर फंसे 500 से अधिक नागरिकों का रेस्क्यू किया। सतना में चितहरा-मझगवां के बीच रेलवे ट्रैक पर पानी भरने और पटरियों के नीचे की मिट्टी धंसने से कई एक्सप्रेस ट्रेनें प्रभावित हुईं। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा मानकों की जांच के बाद ही ट्रेनों का परिचालन दोबारा शुरू किया गया है। इस बीच, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को सतना जिले के चित्रकूट पहुंचकर मंदाकिनी की बाढ़ और अतिवृष्टि से हुए नुकसान का जमीनी जायजा लेंगे। प्रशासन द्वारा राहत शिविरों में रुके लोगों के लिए भोजन, पानी और चिकित्सा की विशेष व्यवस्था की गई है।

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