भोपाल के मुकुल और मनीष ने शुरू किया अनोखा स्टार्टअप, पॉलीथीन को दे रहे हैं कड़ी टक्कर
भोपाल के दो युवाओं ने मक्के और आलू के स्टार्च से कंपोस्टेबल कैरी बैग बनाने का स्टार्टअप शुरू किया है। आज यह कारोबार 8 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
राजधानी भोपाल के दो युवा उद्यमियों ने कोविड महामारी के दौरान घर बैठे एक ऐसा अनूठा व्यवसायिक विचार तैयार किया जो आज न केवल एक सफल कारोबार बन चुका है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की एक बेहतरीन मिसाल भी पेश कर रहा है। भोपाल के रहने वाले मुकुल द्विवेदी और मनीष द्विवेदी ने लगभग चार साल पहले डेढ़ से दो करोड़ रुपए के शुरुआती निवेश के साथ कंपोस्टेबल (जैव-घुलनशील) कैरी बैग बनाने का काम शुरू किया था। मक्के, आलू और शकरकंद के स्टार्च से तैयार किए जाने वाले जैविक बहुलक (बायोपॉलिमर) से इन बैगों को पॉलीथीन के सबसे सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के तौर पर तैयार किया जा रहा है। कुछ चुनिंदा मशीनों से शुरू हुआ यह लघु उद्योग आज बढ़कर लगभग 8 करोड़ रुपए के सालाना कारोबार के मुकाम पर पहुँच चुका है और इससे सीधे तौर पर 25 से 30 लोगों को रोजगार मिल रहा है।
🔬 छह महीने में मिट्टी में मिल जाने का दावा, प्रयोगशाला में हुई वैज्ञानिक जांच
इन विशेष कैरी बैग्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक तत्वों जैसे मक्के, आलू और शकरकंद के स्टार्च से बने बायोपॉलिमर से तैयार होते हैं। निर्माताओं के अनुसार, हवा, पानी, धूप और मिट्टी के संपर्क में आने के बाद यह सामग्री महज छह महीने के भीतर पूरी तरह गलकर मिट्टी में विलीन हो जाती है। इन उत्पादों की प्रामाणिकता जांचने के लिए इनके नमूनों का परीक्षण केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET) की प्रयोगशाला में कराया गया था। परीक्षण के दौरान बैग को पौधों के नीचे मिट्टी में दबाकर छह महीने तक उसकी विघटन प्रक्रिया की निगरानी की गई। जाँच परिणामों में सामने आया कि इसकी 90 से 95 प्रतिशत सामग्री पूरी तरह नष्ट हो जाती है और कोई भी जहरीला अवशेष पीछे नहीं बचता। इन बैगों का उपयोग वर्तमान में किराना स्टोर, कचरा संग्रहण और बायो-मेडिकल कार्यों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
📈 पॉलीथीन के बराबर पहुँची कीमत, सरकारी सब्सिडी और योजनाओं से मिल रहा है विस्तार
मुकुल का कहना है कि अब कंपोस्टेबल बैग की कीमतें सामान्य पॉलीथीन के लगभग करीब पहुँच चुकी हैं। हालांकि उत्पादन क्षमता और प्रति बैग लागत के अंतर के चलते कुछ ग्राहकों को शुरुआती कीमत में मामूली अंतर जरूर महसूस होता है, लेकिन यदि सरकार की ओर से करों (टैक्स) में और राहत मिले तो इनकी कीमतें आम जनता के लिए और अधिक सुलभ हो सकती हैं। आज इस कंपनी का दायरा सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य हिस्सों और दक्षिण भारत तक में इनकी भारी माँग है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश सरकार की लघु उद्योग प्रोत्साहन योजनाओं, नई मशीनरी पर मिलने वाली 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी और प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाने की सरकारी मदद ने इन युवा उद्यमियों को शुरुआती पूंजी के दबाव से उबारने और अपने व्यवसाय को तेजी से विस्तारित करने में बहुत बड़ी सहायता प्रदान की है।
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