सांची में पद्मश्री सम्मानित पुरातत्वविद् का सम्मान, बीजामंडल और ऐतिहासिक धरोहरों पर रखी अपनी बात

विदिशा और सांची में पद्मश्री से सम्मानित पुरातत्वविद् डॉ. नारायण व्यास का नागरिक अभिनंदन किया गया है। उन्होंने बेसनगर उत्खनन और अपने पुरातात्विक अनुभवों को साझा किया।

Aug 31, 2026 - 12:31
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सांची में पद्मश्री सम्मानित पुरातत्वविद् का सम्मान, बीजामंडल और ऐतिहासिक धरोहरों पर रखी अपनी बात

मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर विदिशा और रायसेन के इतिहास व संस्कृति से जुड़े प्रबुद्धजनों की ओर से प्रसिद्ध पुरातत्वविद् और हाल ही में पद्मश्री सम्मान से अलंकृत डॉ. नारायण व्यास का रविवार को सांची में भव्य नागरिक अभिनंदन किया गया। महाबोधि सोसाइटी के सभागार में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में डॉ. व्यास के दशकों लंबे पुरातात्विक शोध कार्यों को याद किया गया। विशेष रूप से विदिशा की प्राचीन नगरी 'बेसनगर', सांची, भीमबेटका और अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर स्थलों से जुड़े उनके उल्लेखनीय योगदान को रेखांकित किया गया, जिसने इस क्षेत्र के प्राचीन वैभव को दुनिया के सामने लाने में अहम भूमिका निभाई है।

📜 वर्ष 1975 से 1977 तक बेसनगर में किया था उत्खनन, राष्ट्रपति भवन के अनुभव को किया साझा

कार्यक्रम में प्रस्तुत सम्मान-पत्र के अनुसार, डॉ. नारायण व्यास ने वर्ष 1975 से 1977 के बीच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वरिष्ठ अधीक्षक पुरातत्वविद् डॉ. एम.डी. खरे के साथ विदिशा की प्राचीन नगरी बेसनगर में महत्वपूर्ण पुरातात्विक उत्खनन कार्य किया था। इसके अलावा रायसेन क्षेत्र में 'ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया' के रूप में चर्चित प्राचीन संरचना के पुरातात्विक महत्व को उजागर करने में भी उनका विशेष योगदान रहा है। समारोह के दौरान पद्मश्री मिलने के अपने अनुभव को साझा करते हुए डॉ. व्यास ने बताया कि राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री और अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में सम्मान प्राप्त करना उनके जीवन के सबसे गौरवशाली क्षणों में से एक था। उन्होंने इसका श्रेय अपने सभी सहयोगियों और मित्रों के सामूहिक प्रयासों को दिया।

🛕 बीजामंडल के नाम परिवर्तन और पूजा के सवाल पर रखी निष्पक्ष राय, कई दिग्गज रहे मौजूद

कार्यक्रम के दौरान विदिशा के ऐतिहासिक विजय मंदिर यानी 'बीजामंडल' के नाम परिवर्तन और वहाँ पूजा-अर्चना शुरू किए जाने से जुड़े सवाल पर डॉ. नारायण व्यास ने इसे प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एएसआई (ASI) के अधीन आने वाले स्मारकों के मामलों में नाम बदलने के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन और केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होता है। इस अवसर पर शोधकर्ता गोविंद देवलिया, भारतीय इतिहास अनुसंधान समिति के सत्यनारायण शर्मा, और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के सेवानिवृत्त सहायक महानिदेशक ओटा सहित क्षेत्र के कई नामी इतिहास प्रेमी और विद्वान उपस्थित रहे, जिन्होंने इस सम्मान को विदिशा और रायसेन दोनों के लिए गौरव का पल बताया।

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