26 अगस्त से दोनों युवकों से संपर्क टूटा, प्रशासन कंपनी के अधिकारियों से ले रहा है जानकारी
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद रायसेन जिले के दो युवक लापता हो गए हैं। वे मंडीदीप की हाइड्रोपावर कंपनी के जरिए त्रिशूली परियोजना में काम करने गए थे।
पड़ोसी देश नेपाल में आई भीषण और प्रलयकारी बाढ़ के बाद मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। रायसेन जिले के दो युवक नेपाल में लापता बताए जा रहे हैं। ये दोनों युवक मंडीदीप स्थित एक हाइड्रोपावर कंपनी के चार अन्य कर्मचारियों के साथ नेपाल में चल रही 'अपर त्रिशूली-एक जलविद्युत परियोजना' पर काम करने के लिए गए थे। गत 26 अगस्त की सुबह जब अचानक त्रिशूली नदी घाटी में भीषण बाढ़ आई, तब से इन दोनों का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है और उनका कहीं पता नहीं चल रहा है। लापता युवकों में मंडीदीप के रहने वाले हिमांशु शाक्य और सुल्तानपुर तहसील के मंजूसकलां गांव के निवासी विशेष राजपूत शामिल हैं, जो मंडीदीप की 'एंड्रीट्ज हाइड्रो कंपनी' में सेवारत थे।
📞 26 अगस्त की सुबह से परिजनों का संपर्क टूटा, चार अन्य साथी सुरक्षित लेकिन लापता युवकों का नहीं चला पता
कंपनी के इन्हीं चार अन्य कर्मियों के साथ ये दोनों युवा नेपाल के रसुवा जिले में त्रिशूली नदी पर बन रही 216 मेगावाट की 'रन-आफ-द-रिवर' जलविद्युत परियोजना स्थल पर कार्य करने गए थे। लापता युवक विशेष राजपूत के भाई विक्की राजपूत ने जानकारी दी कि 26 अगस्त को सुबह करीब 8:30 बजे उसकी आखिरी बार अपनी नानी के माध्यम से बात हुई थी, जिसके बाद से उसका फोन पूरी तरह बंद है और उससे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। हालांकि, उनके साथ गए कंपनी के अन्य चार लोग सुरक्षित हैं, लेकिन वे भी हिमांशु और विशेष के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने पुष्टि की है कि जिले के दो लोगों के नेपाल बाढ़ में लापता होने की आधिकारिक सूचना मिली है। जिला प्रशासन संबंधित कंपनी के उच्च अधिकारियों से लगातार संपर्क साधकर उनका पूरा विवरण जुटा रहा है, जबकि स्थानीय एसडीएम लगातार पीड़ित परिवारों के संपर्क में बने हुए हैं।
⚠️ परियोजना क्षेत्र में मची सबसे बड़ी तबाही, सुरंगों में भरा चार से पांच फीट तक गाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 26 अगस्त को तिब्बत की सीमा की ओर से अचानक उफनकर आई भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने रसुवा-त्रिशूली घाटी में अभूतपूर्व तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा ने वहां की सड़कें, पुल, रिहायशी बस्तियां और निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। बताया जा रहा है कि 'अपर त्रिशूली-1' परियोजना का मुख्य निर्माण स्थल, वहां तक जाने वाले संपर्क मार्ग और टनल (सुरंग) क्षेत्र इस आपदा से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। हालात यह हैं कि परियोजना की सुरंगों के भीतर चार से पांच फीट तक मोटी गाद (कीचड़) भर चुकी है, जिससे बचाव कार्यों में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)