येलो मोजेक वायरस से तबाह हुई मिर्च की फसल, लाखों की लागत डूबी; किसानों ने लगाई मुआवजे की गुहार

बड़वानी के राजपुर क्षेत्र में वायरस के प्रकोप से मिर्च की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। लागत डूबने से परेशान किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।

Aug 29, 2026 - 16:58
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येलो मोजेक वायरस से तबाह हुई मिर्च की फसल, लाखों की लागत डूबी; किसानों ने लगाई मुआवजे की गुहार

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के राजपुर क्षेत्र में मिर्च की बंपर पैदावार देने वाली फसल इन दिनों एक खतरनाक वायरस की चपेट में आकर पूरी तरह बर्बाद हो रही है। खेतों में लहलहाने वाली फसल अब किसानों के लिए भारी घाटे का सौदा बन चुकी है। कई खेतों में मिर्च के पौधों की पत्तियां सिकुड़ने लगी हैं, पैदावार बुरी तरह प्रभावित हुई है और फलों का आकार भी काफी छोटा रह गया है। किसानों का कहना है कि यह 'येलो मोजेक वायरस' और अन्य अज्ञात बीमारियों का घातक प्रकोप है, जिसके चलते उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। एक तरफ फसल बर्बाद हो रही है और दूसरी तरफ मंडी में छोटी मिर्च के उचित दाम न मिलने से किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।

💸 महीनों की मेहनत और लाखों की पूंजी बर्बाद: उधारी चुकाने और अगली फसल के लिए पूंजी जुटाने का संकट

हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कई किसान तैयार खड़ी फसल को बचाने की जद्दोजहद छोड़ने के बाद उसे खुद उखाड़कर फेंकने या उस पर ट्रैक्टर चलाने को मजबूर हैं। राजपुर के किसान रमेश शोभाराम कुशवाहा ने बताया कि उन्होंने करीब दो एकड़ जमीन पर मिर्च की खेती की थी, जिस पर एक लाख रुपये से अधिक की लागत आई थी, लेकिन वायरस ने सब कुछ तबाह कर दिया। इसी तरह किसान शुभम ने करीब तीन एकड़ में ढाई से तीन लाख रुपये खर्च कर फसल उगाई थी, जो शुरुआती दौर में बेहद अच्छी दिख रही थी। अब स्थिति यह है कि किसानों के सामने लागत की भरपाई करना तो दूर, अगली खेती के लिए पूंजी जुटाने और कर्ज चुकाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

📢 प्रशासन से सर्वे कराकर उचित मुआवजे की मांग, मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी

बड़वानी जिले में बड़े पैमाने पर मिर्च की खेती की जाती है, और इस साल लगभग 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मिर्च बोई गई थी। यदि इस वायरस का प्रकोप ऐसे ही फैलता रहा, तो किसानों को और भी बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसे लेकर किसानों और स्थानीय संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द प्रभावित खेतों का सर्वे कराया जाए, वास्तविक नुकसान का आकलन कर किसानों को उचित मुआवजा और फसल बीमा का लाभ दिया जाए। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते शासन-प्रशासन की ओर से राहत नहीं पहुंचाई गई, तो उन्हें मजबूरन बड़े स्तर पर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

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