सितंबर में छात्रसंघ चुनाव कराने पर संशय बरकरार, मुख्यमंत्री लेंगे चुनाव प्रणाली पर अंतिम निर्णय

मध्य प्रदेश के कॉलेजों में सितंबर में होने वाले छात्रसंघ चुनाव की प्रणाली पर अभी तक फैसला नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस पर अंतिम निर्णय लेंगे।

Aug 30, 2026 - 10:18
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सितंबर में छात्रसंघ चुनाव कराने पर संशय बरकरार, मुख्यमंत्री लेंगे चुनाव प्रणाली पर अंतिम निर्णय

मध्य प्रदेश के सभी शासकीय और निजी महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में बहुप्रतीक्षित छात्रसंघ चुनाव आगामी सितंबर माह में प्रस्तावित हैं, लेकिन चुनाव की तारीखें बेहद नजदीक आ जाने के बावजूद राज्य सरकार अभी तक यह तय नहीं कर पाई है कि इस बार चुनाव किस प्रणाली के तहत कराए जाएंगे। उच्च शिक्षा विभाग ने चुनाव संपन्न कराने से संबंधित अपने तमाम प्रस्ताव और विकल्प शासन को भेज दिए हैं। अब इस बात पर अंतिम मुहर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लगानी है कि चुनाव प्रत्यक्ष पद्धति से होंगे या अप्रत्यक्ष पद्धति से। हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग के वार्षिक शैक्षणिक कैलेंडर में सितंबर महीने में ही छात्रसंघ चुनाव कराए जाने का स्पष्ट उल्लेख किया गया है, और इसी आधार पर जबलपुर उच्च न्यायालय ने भी सरकार को सितंबर माह के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अदालत के आदेश के बाद उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विभागीय अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर संभावित व्यवस्थाओं और मॉडलों पर गहन चर्चा की थी।

⚠️ एनएसयूआई की चेतावनी और एबीवीपी की मांग: प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने का दबाव

चुनाव प्रणाली की व्यवहारिकता का परीक्षण करने के लिए पूर्व में एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने अपने प्रस्ताव शासन को सौंप दिए हैं। लेकिन सरकार के स्तर पर नीतिगत निर्णय में हो रही देरी के कारण छात्र संगठनों में बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है। मुख्य विपक्षी दल से जुड़े छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि आगामी एक सप्ताह के भीतर आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया, तो संगठन एक बार फिर से उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा। वहीं दूसरी ओर, सत्ताधारी दल से जुड़ा छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) भी मुख्यमंत्री को कई बार पत्र लिखकर यह मांग दोहरा चुका है कि चुनाव केवल प्रत्यक्ष प्रणाली (डायरेक्ट वोटिंग) से ही कराए जाने चाहिए, ताकि छात्र अपने नेतृत्व का चयन सीधे तौर पर कर सकें। वर्तमान में एबीवीपी द्वारा कॉलेजों की विभिन्न अव्यवस्थाओं को लेकर पूरे प्रदेश में 'विद्यार्थी हुंकार अभियान' चलाया जा रहा है, जिसमें भी छात्रसंघ चुनाव की स्थिति तत्काल स्पष्ट करने की पुरजोर मांग उठाई जा रही है।

📅 साल 2017 से बंद हैं छात्रसंघ चुनाव, हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद जगी उम्मीदें

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद से एक बार भी छात्रसंघ चुनाव आयोजित नहीं किए गए हैं। पिछले कई वर्षों से विभिन्न प्रशासनिक कारणों और राजनीतिक वजहों का हवाला देकर सरकार द्वारा चुनाव को टाला जाता रहा है। ऐसे में इस बार विभाग के वार्षिक कैलेंडर में चुनाव का उल्लेख होने और जबलपुर हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद से छात्र संगठनों और युवाओं में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली की उम्मीदें एक बार फिर जगी हैं। विभाग के अधिकारियों का भी कहना है कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रणाली को लेकर फिलहाल शासन स्तर पर अंतिम निर्णय होना बाकी है, और प्रस्ताव शासन को प्रेषित किए जा चुके हैं जिस पर मुख्यमंत्री कार्यालय से अंतिम मुहर लगना शेष है।

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