जिब्रिल 'वन-आर्म्ड' के जरिए सोमालिया तक पहुंच रहे मिलिट्री लेवल के हथियार, जानिए क्या हैं मायने

यमन के हूती विद्रोहियों और सोमालिया के आतंकी संगठन अल-शबाब के बीच हथियारों की सप्लाई का नेटवर्क सामने आया है। इससे लाल सागर की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

Sep 01, 2026 - 14:38
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जिब्रिल 'वन-आर्म्ड' के जरिए सोमालिया तक पहुंच रहे मिलिट्री लेवल के हथियार, जानिए क्या हैं मायने

यमन के हूती विद्रोहियों और अलकायदा से जुड़े सोमालिया के कुख्यात आतंकी संगठन अल-शबाब के बीच हथियारों की सप्लाई और आपसी सहयोग का एक खतरनाक नेटवर्क सामने आया है। इस खुफिया नेटवर्क के जरिए यमन से अत्याधुनिक मिलिट्री लेवल के हथियार सोमालिया तक पहुंचाए जाने की बात सामने आई है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह का रणनीतिक सहयोग दोनों आतंकवादी संगठनों को अपने-अपने नापाक मंसूबों और फायदों को पूरा करने में बड़ी मदद कर सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती खड़ी हो गई है।

🕵️‍♂️ जिब्रिल 'वन-आर्म्ड' के जरिए होता था हथियारों का सौदा, पैसों और तकनीक का हो रहा है आपसी लेन-देन

‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे हथियारों के नेटवर्क में जिब्रिल ‘वन-आर्म्ड’ याह्या अली नामक एक सोमाली व्यक्ति की मुख्य भूमिका सामने आई है, जो यमन से अवैध हथियार खरीदकर उन्हें सोमालिया में सक्रिय अल-शबाब तक पहुँचाता था। रिपोर्ट में बताया गया है कि जिब्रिल ने यमन के अल-गायदा क्षेत्र में एक हथियार तस्कर की मदद से हूतियों से ये आधुनिक हथियार हासिल किए थे। अल-शबाब के पास वित्तीय संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं, लेकिन उसे हथियारों, सैन्य ट्रेनिंग और आधुनिक टेक्नोलॉजी की आवश्यकता रहती है, जबकि हूतियों के पास हथियारों की पहुंच तो है लेकिन उन्हें पैसों और बाहरी नेटवर्क की तलाश है। इसी पारस्परिक जरूरत ने दोनों के बीच इस सांठगांठ को जन्म दिया है।

🌊 लाल सागर और अदन की खाड़ी की सुरक्षा पर मंडराया बड़ा खतरा, पश्चिमी देशों की बढ़ी चिंता

हूतियों और अल-शबाब के बीच बने इस संभावित और खतरनाक गठजोड़ का सबसे बुरा असर लाल सागर और अदन की खाड़ी के रणनीतिक समुद्री मार्ग पर देखने को मिल सकता है। यमन और सोमालिया के बीच का यह इलाका पहले से ही वैश्विक व्यापार और सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। हालांकि वैचारिक मतभेदों के चलते इसे पूरी तरह औपचारिक गठबंधन कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन हथियारों की यह तस्करी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि साझा स्वार्थ के लिए यह सीमित सहयोग क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक विकराल समस्या बन सकता है।

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