450 करोड़ की लागत से बने जबलपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल की खुली पोल, छत से टपक रहा पानी और फर्श पर भरा जलभराव

450 करोड़ रुपए की लागत से बने जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट के नए टर्मिनल की हालत खराब हो गई है। हल्की बारिश में छत से पानी टपकने और फर्श पर जलभराव से यात्रियों को परेशानी हो रही है।

Sep 01, 2026 - 14:59
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450 करोड़ की लागत से बने जबलपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल की खुली पोल, छत से टपक रहा पानी और फर्श पर भरा जलभराव

मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट को करीब 450 करोड़ रुपए खर्च करके अत्याधुनिक बनाया गया था और एक नई टर्मिनल बिल्डिंग खड़ी की गई थी। दावा किया गया था कि इससे यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं मिलेंगी, जिसका वर्चुअली उद्घाटन 29 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। लेकिन महज दो साल के भीतर ही करोड़ों रुपए की लागत से बने इस एयरपोर्ट की पोल खुलकर सामने आने लगी है। स्थिति यह है कि एयरपोर्ट के अंदर प्रवेश करते ही यात्रियों का स्वागत फर्श पर भरे पानी और टपकती छतों से हो रहा है, जबकि मुख्य गेट का सेंसर लगा स्लाइडिंग दरवाजा भी टूटा हुआ है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रबंधन को जगह-जगह 'सावधान फर्श गीला है' के बोर्ड लगाने पड़े हैं।

🌧️ फैब्रिक कैनोपी टूटने का हादसा और बारिश में तालाब बना टर्मिनल, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

नवनिर्मित टर्मिनल बिल्डिंग को पीक आवर्स में 500 से अधिक यात्रियों के आवागमन और आधुनिक सुविधाओं (जैसे एयरोब्रिज, चेक-इन काउंटर, एस्केलेटर) को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। हालांकि, निर्माण की गुणवत्ता शुरू से ही सवालों के घेरे में रही है। पूर्व में भी भारी बारिश के कारण टर्मिनल के बाहर लगी फैब्रिक कैनोपी (शेड) का एक बड़ा हिस्सा गिर गया था, जिसकी चपेट में आकर आयकर विभाग के अधिकारी की कार बाल-बाल बची थी। वर्तमान में भी थोड़ी सी बारिश में छत से लगातार पानी टपक रहा है और परिसर के बाहर पानी जमा हो रहा है। यात्रियों का कहना है कि 450 करोड़ खर्च होने के बाद भी इस तरह के हालात मिलना बेहद निराशाजनक और जांच का विषय है।

🔍 उच्च स्तरीय जांच की मांग और घटती फ्लाइट्स से शहर की छवि पर असर

वायु सेवा संघर्ष समिति के अध्यक्ष हिमांशु खरे ने इस पूरे मामले पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए साढ़े 400 करोड़ रुपए से हुए निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि शहर की पहली छाप वहां के एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन से ही तय होती है, ऐसे में बाहर से आने वाले यात्रियों का स्वागत अगर इस बदहाली से हो, तो शहर की छवि पर बुरा असर पड़ता है। दूसरी ओर, एयरपोर्ट प्रबंधन का कहना है कि रिपेयरिंग का काम चल रहा है और सुरक्षा के मद्देनजर कुछ गेट बंद किए गए हैं। हालांकि, विस्तारीकरण के दावों के विपरीत वर्तमान में जबलपुर से मात्र 7 फ्लाइट्स ही संचालित हो रही हैं, जबकि कई रूटों की उड़ानें बंद हो चुकी हैं।

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