600 पन्नों की ज्यूडिशियल रिपोर्ट में 8 से 10 अधिकारी दोषी करार, 36 लोगों की मौत से जुड़ा मामला
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में ज्यूडिशियल जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंप दी गई है। कोर्ट ने रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है।
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में पिछले दिनों दूषित पानी पीने के कारण लगभग 36 लोगों की दर्दनाक मौत के मामले में हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई जारी है। इस गंभीर घटना की जांच के लिए गठित किए गए ज्यूडिशियल कमीशन ने अपनी 600 पन्नों से अधिक की विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश कर दी है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल इस जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से साफ इनकार कर दिया है और नगर निगम को रिपोर्ट के आधार पर अपना जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में प्रशासनिक लापरवाही और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर राजनीति भी गरमाने लगी है।
⚖️ जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 24 मौतों का सीधा संबंध सीवेज मिले पानी से
दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान हुई इन मौतों की जांच के लिए 27 जनवरी 2026 को रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया गया था। आयोग द्वारा सौंपी गई 600 पन्नों की रिपोर्ट के अनुसार, 36 में से 24 मौतों का सीधा संबंध म्युनिसिपल पाइपलाइन में सीवेज का गंदा पानी मिलने से था। जांच में सामने आया है कि पुरानी पाइपलाइन को समय पर बदलने और नई नर्मदा जल लाइन के टेंडर प्रक्रिया में हुई भारी देरी के कारण यह पूरा संकट पैदा हुआ। वकीलों के मुताबिक, रिपोर्ट में करीब 8 से 10 प्रशासनिक अधिकारियों को इसके लिए दोषी ठहराया गया है और उनकी जवाबदेही तय की गई है।
🏛️ विपक्षी नेताओं ने की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग, मुआवजे और सुधार के सुझाए गए उपाय
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मांग की है कि इस ज्यूडिशियल रिपोर्ट को पूरी तरह सार्वजनिक किया जाए और केवल अधिकारियों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही भी तय हो। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट में यह भी दलील दी कि शहर के कई सरकारी अस्पतालों के पेयजल में भी वही बैक्टीरिया पाए गए हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े होते हैं। फिलहाल, कोर्ट के निर्देशों के बाद अब नगर निगम और प्रशासन को इस बहुचर्चित मामले में अपना जवाब प्रस्तुत करना है।
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