रतलाम मंडल में रेलवे पटरियों को जोड़ने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग, घटाई गई ट्रैफिक ब्लॉक की अवधि
पश्चिम रेलवे ने मुंबई-दिल्ली व्यस्त रेलमार्ग पर पहली बार मोबाइल फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन का उपयोग किया है। इससे कम समय में पटरियों की मरम्मत और वेल्डिंग का कार्य पूरा किया गया।
देश के सबसे व्यस्ततम रेल मार्गों पर पटरियों को जोड़ने और उनमें सुधार करने का काम बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ट्रेनों के लगातार आवागमन के कारण इस काम को बहुत तेज गति से पूरा करना होता है, यही वजह है कि अब भारतीय रेलवे द्वारा इस प्रकार के कार्यों के लिए 'मोबाइल फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन' का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इस आधुनिक तकनीक के जरिए कई दिनों तक चलने वाला पटरी सुधार का काम अब मात्र कुछ ही घंटों में सफलतापपूर्वक पूरा कर लिया जाता है, जिससे रेल यातायात बाधित नहीं होता।
🔧 गोधरा-दाहोद रेलखंड पर पहली बार हुआ प्रयोग, 3 घंटे के ट्रैफिक ब्लॉक में बदले गए रेल पैनल
पश्चिम रेलवे द्वारा मुंबई-दिल्ली के अति व्यस्त रेलमार्ग पर ट्रैक की मजबूती और पूरी तरह सुरक्षित रेल परिचालन सुनिश्चित करने के लिए पहली बार मोबाइल फ्लैश बट वेल्डिंग तकनीक का उपयोग किया गया है। यह महत्वपूर्ण कार्य गोधरा-दाहोद रेलखंड के कांसुधी-चंचेलाव खंड के अंतर्गत डाउन मैन लाइन पर सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। निर्धारित महज 3 घंटे के ट्रैफिक ब्लॉक कॉरिडोर के दौरान खराब रेलवे पटरी के हिस्सों को हटाकर नए रेल पैनल लगाए गए और इस आधुनिक मशीन के जरिए पटरियों को आपस में मजबूती से जोड़ा गया।
⚡ कैसे काम करती है यह आधुनिक मशीन और क्या हैं इसके बड़े फायदे?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मोबाइल फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन एक चलित (मूविंग) इंजन में पूरी तरह से इंस्टॉल रहती है। अपनी खास तकनीकी खूबियों के कारण यह मशीन पटरियों को ऐसा मजबूत और टिकाऊ जोड़ प्रदान करती है, जो भारी ट्रेनों के बोझ और तेज झटकों को आसानी से सहन कर सकता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान 32 कर्मचारियों की विशेष वेल्डिंग टीम और 45 कर्मचारियों की ट्रैक रिन्यूअल टीम ने मिलकर तय समय सीमा के भीतर इस कार्य को अंजाम दिया, जिससे संभावित वेल्ड खराबियों को रोककर यात्रियों के लिए सफर को और अधिक सुरक्षित बनाया गया है।
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