भोपाल शूटिंग स्कैम: देश के लिए चलने वाली गोलियां अब अपराधियों के पास; 69 शूटर्स के लाइसेंस रद
भोपाल में स्पोर्ट्स कोटे के कारतूसों की कालाबाजारी का बड़ा खुलासा। 69 शूटर्स के लाइसेंस रद। प्रशासन ने 'ऑपरेशन क्लीन' के तहत नियमों में किया बड़ा बदलाव।
भोपाल। राजधानी की शूटिंग रेंज से आने वाली गोलियों की गूंज अब तक देश के लिए मेडल जीतने वाले होनहारों की कहानी बयां करती थी, लेकिन इसी गूंज के पीछे एक खौफनाक सच छिपा था। स्पोर्ट्स कोटे के तहत देश का मान बढ़ाने के लिए मिलने वाले कारतूस चंद रुपयों के लालच में अपराधियों की बंदूकों की 'खुराक' बन रहे थे। एक जांच रिपोर्ट में सामने आया कि कई ऐसे लोगों के नाम पर कारतूस जारी हो रहे थे, जिन्होंने कभी किसी प्रतियोगिता में हिस्सा तक नहीं लिया था। भोपाल के 135 शूटर्स की जांच के बाद 69 के लाइसेंस रद और 10 के निलंबित कर दिए गए हैं।
'ऑपरेशन क्लीन': प्रशासन ने कड़े किए नियमों के पेंच
इस बड़े फर्जीवाड़े के बाद भोपाल जिला प्रशासन ने 'ऑपरेशन क्लीन' शुरू करते हुए नियमों को बेहद सख्त कर दिया है। अब तक जो शूटर सालभर में 15 हजार से लेकर 1 लाख तक कारतूस आसानी से ले लेते थे, अब उनकी मनमानी पर रोक लगा दी गई है। नए नियमों के अनुसार:
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कारतूस की सीमा: एक शूटर को एक बार में अधिकतम 500 और सालभर में केवल 1000 कारतूस ही जारी किए जाएंगे।
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अतिरिक्त आवश्यकता: यदि किसी खिलाड़ी को इससे अधिक कारतूस चाहिए, तो उन्हें खेल संचालक (Sports Director) से बाकायदा सत्यापन कराना होगा।
बंदूकों की संख्या और हर गोली का हिसाब
प्रशासन ने हथियारों की संख्या पर भी 'कैंची' चला दी है। अब नेशनल और इंटरनेशनल स्तर के खिलाड़ी भी अधिकतम केवल दो बंदूक के लाइसेंस ही रख सकेंगे, जबकि पहले उन्हें 8 से 10 बंदूकें रखने की छूट थी। इसके अलावा, प्रशासन हर एक गोली का हिसाब रखने की तैयारी में है। राज्य सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया है जिसमें कारतूस के खाली खोखों (Empty Shells) का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है।
अनिवार्य हुआ लिखित विवरण
अब शूटर्स को यह लिखित में देना होगा कि कारतूस किस विशिष्ट प्रतियोगिता के लिए खरीदे जा रहे हैं और उनका इस्तेमाल किस शूटिंग रेंज में किया जाएगा। इस सख्ती से अब अपराधियों तक सरकारी कोटे की गोलियां पहुंचने का रास्ता लगभग बंद हो जाएगा।
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